आसमान में बिजली कड़कते ही हो जाएं सावधान : एडीएम

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । बारिश या मानसून में बिजली कड़कना या गिरना आम बात है। इससे बचने के लिए स्वयं की सावधानी ही जान बचा सकती है। हालांकि आपदा विभाग द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष प्रचार-प्रसार कराया जाता है। लेकिन लोग बारिश के दौरान पेड़ के नीचे छुप जाते हैं। जिससे आकाशीय बिजली के चपेट में आ जाते हैं और अपनी जान से हाँथ धो बैठते हैं।

आकाशीय बिजली गिरने की घटना को लोग प्राकृतिक घटना मानकर इस पर ज्यादा कुछ कहने में खुद से समझौता कर लेते हैं। कोई भी बिजली गिरना या कड़कना तो नहीं रोक सकता हैं, लेकिन कुछ सावधानियाँ रखकर कम से कम इससे होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम जरूर कर सकता है।

अपर जिलाधिकारी योगेन्द्र बहादुर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि मानसून के दौरान आम जन-मानस पर कई आपदाओं का खतरा बना रहता है। हाल के वर्षो में वज्रपात एक अत्यन्त खतरनाक और प्रायः घटित होने वाली आपदाओं में से एक है। वज्रपात पृथ्वी पर सबसे पुरानी देखी गई प्राकृतिक घटनाओं में से एक है परन्तु आम जन-मानस के मध्य इसके प्रति जागरूकता का काफी अभाव है, जिसके कारण बड़ी संख्या में जनहानियां एवं पशुहानि हो रही है। थोड़ी सी सावधानी अपना कर काफी हद तक वज्रपात से बचाव किया जा सकता है और वज्रपात से होने वाली जन-धन, पशु एवं अन्य हानि को न्यून किया जा सकता है। जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण द्वारा वज्रपात में “क्या करें, क्या न करें” जारी किया गया है।

उन्होंने बताया कि रबर सोल के जूते व टायर वज्रपात से सुरक्षा प्रदान नहीं करते हैं। बिजली गिरने को खिड़की से न देखें अन्दर के कमरे अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित होते है। बादलों की गड़-गड़ाहत का तेज व बार बार होना बडे़ खतरे की सूचना है। बादलों की गड़गड़ाहट सुनायी देने पर या बिजली चमकती दिखायी देने पर तुरन्त सुरक्षित स्थान में आश्रय लें। बिजली से चलने वाले मुख्य उपकरण जैसे फ्रिज, कम्प्यूटर, टेलीविजन आदि को विद्युत आपूर्ति लाईन से निकाल दें व मोबाईल का उपयोग न करें। वज्रपात की स्थिति में नल से होकर आ रहे पानी का उपयोग न करें, पानी के नल में विद्युत प्रवाह हो सकता है। वज्रपात सुरक्षित निस्तारण हेतु अपने घर में तड़ित चालक स्थापित करवायें। आपातकालीन सेवाओं का फोन नम्बर पास रखें। रेडियो से मैसम की जानकरी लेते रहें। बिजली की स्थिति में बाहर खुले में रहना सुरक्षित नहीं है। अतः तुरन्त सुरक्षित आश्रय में जायें। पेड़, खम्बों या घातु की वस्तुओं से दूर रहें, यह वज्रपात को आकर्षित कर सकते हैं। शरीर के बालों का खड़ा होना तथा त्वचा में झुरझुरी महसूस होना बताता है कि आपके आस-पास बिजली गिरने वाली है। वज्रपात के कारण घायल हो गये व्यक्ति को छूना पूर्णतः सुरक्षित है, इससे झटका नहीं लगता है। वज्रपात से घायत व्यक्ति को तत्काल अस्पताल लें जायें। कंक्रीट के फर्श पर न लेटे और कंक्रीट की दीवारों का सहारा न लें, बिजली गिरने के दौरान इनमें करंट प्रवाह हो सकता है। अगर आप तालाब, नदी, नहर तथा खेत में सिंचाई कर रहे हों तत्काल वहॉ से बाहर निकल जाए। बादलों की गड़-गड़ाहत होने पर मोबाइल फोन का प्रयोग न करें। मौसम खराब होने पर अगर कहीं सुरक्षित स्थान पर जाने मे समय लगता हो तो अपने दोनो कानों पर हाथ रखकर दोनो एडि़यों को आपस में जोड़कर जमीन पर क्राउच पोजिशन (मुर्गे की तरह) बना कर बैठ जायें।


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