जिलाधिकारी की अनोखी पहल “एक गांव-एक बाग” से आत्मनिर्भर बनेंगी ग्राम पंचायतें

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

प्रतीकात्मक तस्वीर

सोनभद्र । वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते पूरे देश में किये गए लॉक डाउन के बाद प्रवासी मजदूरों की घर वापसी ने सभी राज्य सरकारों की चिंताएं बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रवासी मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने के लिए अधिक से अधिक मनरेगा के कामों में उन्हें शामिल करने का निर्देश जारी किया। इसी के क्रम में जिलाधिकारी एस0 राजलिंगम ने एक अनोखी पहल की शुरुआत की है। जिलाधिकारी ने “एक गांव-एक बाग” की योजना लांच किया है। जिसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत की सरकारी भूमि पर एक फलदार बाग लगाया जाएगा। इस बाग को गांव के लोग ही तैयार करेंगे और उनके मजदूरी का भुगतान मनरेगा से किया जाएगा। इस बाग के सुरक्षा से लेकर बाग के फलों पर ग्राम पंचायत का अधिकार होगा। जिसे वह बेचकर अथवा नीलामी कर राजस्व बढ़ा सकता है।

जानकारी के अनुसार लॉक डाउन के दौरान जिले में लगभग 25 हजार से अधिक प्रवासी मजदूरों ने घर वापसी की है। प्रवासी मजदूरों के घर वापसी से सबसे बड़ी समस्या उन्हें रोजगार देने की थी। ताकि उनका पेट से परिवार चल सके। इसी उद्देश्य से जिलाधिकारी द्वारा शुरू किया गया “एक गांव-एक बाग” योजना इन दिनों काफी चर्चा में है। इस अनोखी योजना में हर ग्राम पंचायत में मौजूद सरकारी भूमि पर एक बाग तैयार किया जाएगा, जिसमें फलदार वृक्ष के पेड़ लगाए जाएंगे। कम से कम एक एकड़ जमीन में तैयार होने वाले बाग की निगरानी के दायित्व भी ग्रामीणों की होगी। इस बाग में काम करने वाले सभी मजदूरों को मनरेगा से भुगतान किया जाएगा।

जिलाधिकारी के इस अनोखे योजना को लेकर लोढ़ी ग्राम प्रधान शमशेर बहादुर सिंह का कहना हैं कि “इस बाग में होने वाले पैदावार पर ग्राम पंचायत का अधिकार होगा और उसकी बिक्री या नीलामी से मिलने वाला राजस्व ग्राम पंचायत के खाते में जमा होगा।”

वहीं इस योजना को लेकर जिलाधिकारी भी काफी उत्साहित हैं। डीएम एस0 राजलिंगम कहना है कि “एक गांव-एक बाग योजना से जहां एक तरफ जनपद में वृक्षारोपण का लक्ष्य पूरा होगा वहीं ग्रामीण स्तर पर प्रवासी मजदूरों के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा साथ ही बाद में इस बाग की नीलामी करके ग्राम पंचायत अपना राजस्व भी बढ़ा सकता है।”

जिलाधिकारी के इस अनोखे प्रयोग से न सिर्फ पर्यावरण को बल मिलेगा बल्कि पूरे जनपद में ग्रामीण स्तर पर लोगों को रोजगार भी मिलेगा। निश्चित तौर पर यदि यह योजना सफल रही तो यह योजना प्रधानमंत्री के उस उद्देश्य को भी पूरा करती दिखेगी, जिसमें प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर बनने की बात कही थी।


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