डॉ. मुखर्जी की बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि

कृपाशंकर पांडे (संवाददाता)

ओबरा। डॉ॰ मुखर्जी जम्मू कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे, उसे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने पूर्ण कर दिया। उस समय जम्मू कश्मीर का अलग झण्डा और अलग संविधान था। वहाँ का मुख्यमन्त्री (वजीरे-आज़म) अर्थात् प्रधानमन्त्री कहलाता था। उक्त बातें भारतीय संस्कृति के पोषक, राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक, सोनभद्र में सामाजिक सेवा के लिए ख्याति प्राप्त और भाजपा के जिलामंत्री कन्हैयालाल जायसवाल ने कही। इसके पूर्व डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के मौके बूथ 59 श्रीराम मंदिर कॉलोनी के पुष्पांजलि अर्पित की गई।

जिला मंत्री ने कहा कि संसद में अपने भाषण में डॉ॰ मुखर्जी ने धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की थी। अगस्त 1952 में जम्मू की विशाल रैली में उन्होंने अपना संकल्प व्यक्त किया था कि या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊँगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपना जीवन बलिदान कर दूँगा। मुखर्जी ने तात्कालिन नेहरू सरकार को चुनौती दी और अपने दृढ़ निश्चय पर अटल रहे। अपने संकल्प को पूरा करने के लिये वे 1953 में बिना परमिट लिये जम्मू कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े। वहाँ पहुँचते ही उन्हें गिरफ्तार कर नज़रबन्द कर लिया गया। 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई। डॉ. मुखर्जी के सपनों को देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पूरा किया है और पूरे विश्व में भारत का डंका बजाने में समर्थ हैं। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी जन्म 6 जुलाई 1901 को कलकत्ता में हुआ था और 23 जून 1953 को श्रीनगर में रहस्यमय मृत्यु हुई थी। बलिदान दिवस के मौके पर मण्डल उपाध्यक्ष शिवनाथ आर्थिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश यादव, अल्प संख्यक मोर्चा जिला महामंत्री गुलाम अली, पिछड़ा मोर्चा के मंत्री विनय सिंह, सेक्टर संयोजक सभासद आनन्द जायसवाल, सेक्टर सह संयोजक विभास घटक बूथ संख्या 69 के बूथ अध्यक्ष दुर्गा वर्मा, राजेश शर्मा आदि ने पूजन-अर्चन किया।


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