खनन विभाग के पत्र ने खोली विभाग की पोल, परिवहन माफियाओं के आगे प्रशासन लाचार

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

ओवरलोड से राजस्व नुकसान के साथ सड़कें हो रही खराब- खनन अधिकारी

■ खनन विभाग ने टोल महाप्रबंधक से मांगी दो लेन, अब टोल पर चेक करने की तैयारी

■ रात में चलता है अवैध परिवहन का खेल

■ लॉक डाउन खुलते ही एक्टिव हुए परिवहन माफिया

■ पट्टा धारकों व क्रेशर प्लांट की भी परिवहन माफियाओं से साठ-गांठ

■ यदि लोडिंग स्थल पर कसी गयी होती नकेल तो प्रशासन सड़कों पर न दिखता बेबस

सोनभद्र । योगी सरकार में परिवहन माफिया किस कदर प्रशासन पर हाबी हैं इसका खुलासा आज जनपद न्यूज Live करेगा। खनन से जुड़े परिवहन माफियाओं के आगे प्रशासन कैसे बेबस नजर आ रही है, यह भी जनपद न्यूज Live आपको आज बताने वाला है।

जनपद न्यूज Live के हाथ लगी खनन अधिकारी द्वारा जारी पत्र ने प्रशासन के दावे की पोल खोल दी। 17 जून को लिखे खनन अधिकारी के पत्र से साफ हो गया कि तमाम कोशिशों के वावजूद अभी भी ओवरलोड गाड़ियां चल रही हैं। खनन अधिकारी का पत्र इस बात की तरफ भी इशारा कर रहा है कि परिवहन माफियाओं के आगे कैसे प्रशासन मजबूर है। खनन अधिकारी ने अपने पत्र में लिखा है कि कुछ गाड़ियां भीड़ का फायदा उठाकर भाग जा रही हैं, जिससे न सिर्फ सरकारी राजस्व की क्षति हो रही है बल्कि सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। खनन अधिकारी ने ओवरलोड व बिना परमिट परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए लोढ़ी टोल प्लाजा के महाप्रबन्धक से मदद मांगी है कि वे दो लेन खनिज की गाड़ियों को चेक करने के लिए उपलब्ध कराएं।
कुल मिलाकर प्रशासन और परिवहन माफियाओं के बीच तू डाल-डाल तो मैं पात-पात की कहावत चल रही है ।

आपको बता दें कि लॉक डाउन खुलने के साथ ही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए खनन व परिवहन का कार्य को शुरू किया गया था लेकिन प्रशासन को क्या पता था कि लॉक डाउन में जिस कड़ाई का अनुपालन सभी कर रहे थे वह प्रशासन का डर नहीं बल्कि कोरोना से बचने के लिए था ।लॉक डाउन हटते ही प्रशासन की हरि झंडी मिलने के बाद खनन से जुड़ी गाड़ियां इस कदर रफ्तार पकड़ ली कि प्रशासन के लिए ही सिरदर्द बन गया। अवैध परिवहन व बिना परमिट की चल रही गाड़ियों पर अंकुश लगाने के लिए बैच बनाकर अभियान की शुरुआत की गई।
अभियान के पहले खनन विभाग के सर्वेयर ने दो आडियो जारी कर खनन बैरियर व पट्टा धारकों व क्रेशर मालिकों को नियम बता दिया था कि कोई भी ओवरलोड व बिना परमिट गाड़ी नहीं चलेगा । यदि ओवरलोड गाड़ी पकड़ी जाती है तो न सिर्फ गाड़ी मालिक पर बल्कि पट्टा धारकों पर भी एफआईआर की कार्यवाही की जाएगी। खनन सर्वेयर ने ऑडियो के माध्यम से सभी को हिदायत दी थी कि आप इसे गंभीरता से लें क्योंकि ऊपर से काफी दबाव है लेकिन परिवहन माफियाओं ने खनन सर्वेयर के किसी बात को गंभीरता से नहीं लिया और रात में ओवरलोड व बिना परमिट का खेल बदस्तूर जारी रखा।

सूत्रों की माने तो रात 12 बजे के बाद से रात 2 बजे तक ओवरलोडिंग गाड़ियां अपनी रफ्तार पकड़ती है, जो किसी के वश में नहीं हो पाती ।

बड़ा सवाल यह है कि हर बार प्रशासन ओवरलोड व बिना परमिट की चल रही गाड़ियों के धड़पकड़ के लिए अभियान चलाता है और नतीजा सिफर ही रहता है। यदि ओवरलोड पर सही मायने में प्रशासन नकेल कसना चाहती तो सड़कों पर हाथपांव मारने के बजाय लोडिंग स्थल पर ही कड़ाई कर देती लेकिन खनन विभाग को भी पता है कि यह अभियान कुछ ही दिनों का है लेकिन उनके रिश्ते लंबे समय तक रहेगा।


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