गले मिलना व हाथ मिलाना हुआ गुजरे जमाने की बात

मनोहर कुमार ( वरिष्ठ संवाददाता)

* कोरोना ने इस संस्कृति पर लगाया विराम।
* वायरस के फैलने के डर से लोग रहते हैं दूर।

चन्दौली। भारतीय संस्कृति का आधुनिक रूप बन चुका हाथ मिलाने की परम्परा को एक वायरस ने विराम लगा दिया है। गले मिलने वाली संस्कृति पर भी रोक लग गई है। अब पुरातन संस्कृति हाथ जोड़ने व चरण स्पर्श करने की पद्धति कायम हो रही है। लोग एक दूसरे को दूर से नई सलाम नमस्ते बोल कर हालचाल ले रहे हैं। एमएसपी का भी पालन कर रहे हैं। कोरोना वायरस ने कई परम्पराओं का लोप कर दिया है तो कई का जन्म दिया तो कई का नया आविष्कार कर दिया है। इस समय कोरोना अपने चरम की ओर है। विश्व के अधिकांश देश कोरोना वायरस के संक्रमण से ग्रसित हैं। भारत जैसे विशाल जनसँख्या वाले देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या सवा तीन लाख के पार है। इसमें दस हजार के लगभग लोगों की वायरस से मौत हो गई। इसमें उपचार से ठीक होने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। देश की राजधानी दिल्ली व वित्तीय राजधानी मुम्बई में संक्रमितों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। देश के लिए चिंता की बात है। मुम्बई अन्य बड़े शहरों से आये मजदूर भी जांच के बाद संक्रमित पाए जा रहे हैं।धान के कटोरे के रूप में विखयात चन्दौली जनपद में भी कोरोना संक्रमितों ग्राफ घट बढ़ रहा है। कोरोना के प्रभाव व फैलाव को रोकने के लिए लॉक डाउन किया गया था। अभी लॉक डाउन फेज फाइव 30जून तक चलेगा। इसके साथ अनलॉक भी चलेगा। इसके साथ सोसल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए कहा गया।। इसमें कई परम्परा भी बन्द हो गई। भारत मे हाथ मिलाने व गले मिलने की परम्परा विकसित थी। किसी भी समय मिलने जुलने पर हाथ मिलाने व गले मिलकर प्रेम प्रदर्शित करते थे। लेकिन अब लोग एक दूसरे को दूर से नमस्कार करने को विवश है।मास्क लगाने हाथ सेनेटाइजेशन करने का चलन विकसित हो गया। हालाकि यह कोरोना वायरस के हराने के एक मुख्य हथियार भी है।


अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
error: Content is protected !!