कोरोना की आड़ में चिकित्सक हुए लापरवाह इलाज के नाम पर हो रही खानापूर्ति

विनोद कुमार (संवाददाता)

शहाबगंज। कोरोना त्रासदी में सरकारी अस्पतालों में लापरवाही की हदें पार होती नजर आने लगी हैं। आकस्मिक चिकित्सा सेवा का रंचमात्र लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा। घायल का इलाज हो या फिर गर्भवती का प्रसव कराना। चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों की मनमानी का पोल शुक्रवार को सामने आया। मामला स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है।
जानकारी के अनुसार इलिया थाना के कलानी गांव निवासी नंदा सिंह(42) गुरुवार की रात सड़क किनारे घायलावस्था में पड़े थे। गश्त पर निकली पुलिस ने इलाज के लिए एंबुलेंस की मदद से स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया। उनकी आंख व हाथ में चोट के निशान थे। आरोप है कि उन्हें भर्ती करने की बजाय स्वास्थ्य कर्मियों ने स्ट्रेचर पर ही इलाज शुरू कर दी। ड्रिप सेट लगाकर आवास पर चले गए। चिकित्सक कोरोना का बहाना बनाकर रात में अक्सर गायब रहते हैं। ऐसे में मरीजों व उनके तीमारदारों को हलकान होना पड़ता है। इसी का खामियाजा नंदा को भी भुगतान पड़ा। वे घंटों खुले आसमान के नीचे तड़पते रहे और लावारिस हालात में पड़े रहे। शुक्रवार की सुबह अस्पताल में यह नजारा देख लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। ग्रामीणों ने हो-हल्ला किया तो स्वास्थ्य कर्मी उन्हें वार्ड में ले गए। जानकारी पर परिजन अस्पताल पहुंच गए थे। परिजनों के अनुसार नंदा बीज खरीदने के लिए साइकिल से गुरुवार की शाम इलिया बाजार गए थे। देर शाम तक नहीं लौटने पर उनकी खोजबीन शुरू हो गई थी। ग्राम प्रधान कुलदीप सिंह ने अस्पताल में होने की जानकारी दी तो परिजनों ने राहत की सांस ली। अस्पताल खुलने पर पहुंचे चिकित्सकों ने हालत गंभीर देख उन्हें जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया रेफर कर दिया।प्रभारी चिकित्साधिकारी डा०संजय ने कहां कि मरीज का इलाज किया गया। कर्मचारियों के कमी से कुछ समस्या हो रही है।सीएमओ डा० आरके मिश्र ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे आकस्मिक चिकित्सा सेवा प्रदान की जाती है। इसमें लापरवाही क्षम्य नहीं है। स्ट्रेचर पर इलाज व ड्रिप चढ़ाकर छोड़ देने की शिकायत मिली है। जांच कराकर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।



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