कोटा ग्राम पंचायत में फिर त्रिस्तरीय समिति का गठन

संजय केशरी (संवाददाता)

★ एक करोड़ 78 लाख रुपये गबन के बाद जिलाधिकारी ने लिया था फैसला

★ गबन के मामले में प्रधान, सचिव व जेई के ऊपर दर्ज है FIR

★ पहले भी हो चुका है त्रिस्तरीय समिति का गठन

डाला । विकासखंड चोपन अंतर्गत ग्राम कोटा की प्रधान और सचिव को 178 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता में दोषी पाया गया। इस पर जिलाधिकारी एस0 राजलिंगम ने प्रधान के अधिकार सीज करते हुए त्रिस्तरीय समिति गठित कर दिया है। जहाँ त्रिस्तरीय समिति में अरुण कुमार, विशाल व विफो देवी को शामिल किया गया हैं। वहीं जिलाधिकारी ने कोटा ग्राम पंचायत की अंतिम जाँच के लिए अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक टीम का गठन कर एक माह के भीतर जाँच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
जिलाधिकारी ने डीपीआरओ को भी अंतिम जाँच टीम को प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

बताते चलें कि ग्राम पंचायत कोटा में ग्राम पंचायत सदस्यों द्वारा ग्राम प्रधान, सचिव एवं जेई द्वारा करोड़ों की वित्तीय अनियमितता किया गया है। कोटा ग्राम पंचायत के लोगों द्वारा कई बार घोटाले को लेकर प्रदर्शन किया गया। इतना ही नहीं ग्रामीणों ने शपथ पत्र देकर जिलाधिकारी से जांच कराने की मांग की गई थी। जिसके क्रम में जनपद स्तर से परियोजना निर्देशक डी0आर0डी0ए की अध्यक्षता में एक जाँच कमेटी बनाकर 48 कार्यों की जांच कराई गई। जांच टीम द्वारा पाया गया कि ग्राम पंचायत में बड़े पैमाने पर सीसी रोड का निर्माण कागज पर पूर्ण दिखाया गया परन्तु मौके पर यह कार्य पूर्ण नहीं पाया गया। इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय गौराही में इंटर लॉकिंग खड़ंजा, बालिका पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बाउंड्रीवाल का निर्माण दिखा कर पूरा पैसा निकाला गया परन्तु कार्य अधूरा मिला। इसी तरह अम्माटोला में लाल बहादुर के घर से राम गुल्ली के घर तक इंटर लॉकिंग के कार्य पर 3.33 लाख व्यय किया गया परन्तु मौके पर कार्य नही पाया गया। इतना ही नहीं जांच टीम को प्राथमिक विद्यालय सरपतवा की पत्रावली ही नही मिली। इस प्रकार कमेटी द्वारा कुल 48 कार्य की जांच की गई और 113.89 लाख रुपये का कार्य नही मिला। उसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत की पत्रावलियों में कई कमियां पायी गयी हैं जिसमे तीन स्तर का फोटो ग्राफ कोटेशन टेंडर के कागज माप पुस्तिका आदि नही मिली। थाने में दी गयी तहरीर में बताया गया कि उक्त सभी कार्य ग्राम पंचायत द्वारा चतुर्थ राज्य वित्त एवं चौदहवाँ वित्त आयोग की धनराशि से कराया गया, जिसमें ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से अवर अभियंता के आधार पर भुगतान की कारवाही की जाती हैं। इस प्रकार प्रधान, सचिव आहरण अधिकारी हैं तथा अवर अभियंता संस्तुति अधिकारी हैं, इस प्रकार ग्राम पंचायत कोटा की ग्राम प्रधान मुरहिया देवी तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव बृजेश सिंह तथा तत्कालीन अवर अभियंता लघु सिंचाई संजय कुमार दोषी हैं। जिनके विरुद्ध चोपन थाने में एफआईआर दर्ज करा दिया गया है।


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