चर्चित जरहाँ शौचालय घोटाला : तत्कालीन सचिव व प्रधान पर गबन का आरोप सिद्ध, डीएम ने दिया FIR व रिकवरी का आदेश

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । विकास खण्ड म्योरपुर का चर्चित शौचालय घोटाले के मामले में जांच अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौप दी है । जनपद न्यूज live के हाथ लगी जरहाँ जांच रिपोर्ट में तत्कालीन सचिव शैलेन्द्र सिंह एवं वर्तमान प्रधान श्री राम के विरुद्ध एक बार फिर शौचालय घोटाला साबित हो गया।

27 मजरे वाले गाँव जरहाँ में 2017 से ही शौचालय घोटाले की बात सामने आ रही थी। शौचालय घोटाले को लेकर जरहाँ में पूर्व में भी कई बार जाँच की गई मगर तत्कालीन सचिव शैलेन्द्र सिंह के प्रभाव के चलते जाँच रिपोर्ट उजागर होने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। लाखों रुपये के शौचालय घोटाले की जाँच अभी हाल ही में जिलाधिकारी ने एडीओ पंचायत के माध्यम से कराई थी। जिसकी रिपोर्ट 15 मई को एडीओ पंचायत ने जिलाधिकारी को सौंपा था जिसमें 314 शौचालय मौके पर नहीं पाए जाने की बात सामने आई थी, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 37.68 लाख थी। इतनी बड़ी संख्या में शौचालय न बनने से जिलाधिकारी काफी नाराज हुए और उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को पत्र लिखकर 37.68 लाख रुपये गबन के रिकवरी व दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। मगर एफआईआर दर्ज न होकर जिला विकास अधिकारी की अध्यक्षता में 5 सदस्यी टीम गठित कर दी गयी जो दुबारा जरहाँ में शौचालय घोटाले की जाँच करेगी।

एफआईआर दर्ज न करके दुबारा जाँच टीम गठित कर दिए जाने से नाराज दुद्धी विधायक हरिराम चेरो ने पत्र लिखकर अपनी नाराजगी भी जताई थी। वहीं लोगों को इस यह समझ में नहीं आ रहा था कि जिलाधिकारी द्वारा एफआईआर व गबन की रिकवरी का आदेश दिए जाने के बाद भी कार्यवाही क्यों नहीं हुई। कई दिनों तक गहमागहमी के बीच चली जाँच पूरी हो गयी। जाँच पूरी होने के बाद से ही लोगों को जाँच रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार था।

आखिरकार आज रविवार को जाँच टीम ने प्रशासन को अपनी जाँच रिपोर्ट सौंप दी। जनपद न्यूज़ live के हाँथ लगी जाँच रिपोर्ट में लिखा है कि शैलेन्द्र सिंह द्वारा प्रस्तुत की गई सूची के अनुसार 667 लाभार्थियों में से 547 लाभार्थियों का ही शौचालय निर्माण तत्कालीन सचिव शैलेन्द्र सिंह व ग्राम प्रधान श्री राम द्वारा कराया जाना पाया गया। शेष 122 शौचालयों का निर्माण तत्कालीन सचिव शैलेन्द्र सिंह व ग्राम प्रधान श्री राम द्वारा नहीं कराया गया। इस प्रकार तत्कालीन सचिव शैलेन्द्र सिंह व ग्राम प्रधान श्री राम द्वारा 11लाख 53हजार 9सौ 91 रुपये गबन किया जाना पाया गया।

जिला विकास अधिकारी राम बाबु त्रिपाठी द्वारा जिलाधिकारी को दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही करने हेतु पत्र प्रेषित किया गया है।
आपको बता दें कि 15 मई को जाँच रिपोर्ट में तत्कालीन सचिव शैलेन्द्र सिंह व ग्राम प्रधान श्री राम के ऊपर लगभग 37.68लाख रुपये का गबन का आरोप सिद्ध हुआ था । मगर दुबारा हुई जाँच में गबन मात्र 11.53 लाख ही निकला । यानी लगभग गबन की राशि 26 लाख रुपये कम हो गयी।

पूरे मामले पर जिलाधिकारी एस0 राजलिंगम ने बताया कि “रविवार को जाँच रिपोर्ट मिल गयी है। जाँच रिपोर्ट में 11.53 लाख रुपये का गबन सामने आया है। जिसके आधार पर रिकवरी और तत्कालीन सेक्रेटरी और ग्राम प्रधान पर एफआईआर का आदेश दे दिया गया है।”

बहरहाल कई वर्षों से चली आ रही जाँच से यह तो तय हो गया कि प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रॉजेक्ट शौचालय में भी दीमक लग गया है। बड़ा सवाल ये यह कि गबन के मामले में पहली बार देखा गया कि जाँच के बाद कार्यवाही का आदेश दिए जाने के बाद भी जाँच का मौका दिया गया। जबकि अभी हाल ही में गबन के आरोप का आरोप सिद्ध होने के बाद कोटा पंचायत के ग्राम प्रधान, सचिव व जेई के ऊपर तत्काल गबन का मुक़दमा दर्ज कराया गया था।



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