वन विभाग की छापेमारी : म्योरपुर क्षेत्र में बेशकीमती लकड़ियों के मिलने का सिलसिला जारी

एस प्रसाद (संवाददाता)

■ बड़ा सवाल, आखिर पहले क्यों नहीं हुई छापेमारी

■ पहले की गई होती कार्यवाही तो बच जाता जंगल

■ अभी भी वन माफिया का सरगना गिरफ्त से बाहर

■ वन माफियाओं को सलाखों के पीछे पहुंचाने के बाद ही बच सकता है जंगल

म्योरपुर वन रेंज में जिस तरह हर दिन बेशकीमती लकड़ियों की बरामदगी की जा रही है यह भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है । ग्रामीणों का कहना है कि जब वे लोग शिकायत किया करते थे तो उन्हें फर्जी मुकदमें में फंसाने की धमकी मिलती थी । लेकिन मुख्य वन संरक्षक लखनऊ की टीम द्वारा लगातार तीन दिनों तक काचन के जंगल का निरीक्षण किया तो पोल खुल गयी । सैकड़ों की संख्या में बेशकीमती लकड़ी का कटान पाया गया, जिसके ठूंठ इस बात के गवाह थे । हालांकि मुख्य वन संरक्षक ने अवैध कटान के मामले में रेंजर समेत तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया साथ ही रेणुकूट वन प्रभाग को निर्देश दिया कि हर सप्ताह सभी रेंज ऑफिस से अवैध कटान वह अवैध कब्जे को लेकर साप्ताहिक भेजना होगा । कड़ाई के बाद वन प्रभाग रेणुकूट समेत पूरे रेंज ऑफिसों में हड़कंप मच गया । इतनी बड़ी भ्रष्टाचार की पोल खुलने के बाद डीएफओ ने कमान अपने हाथों में ले ली और लगातार म्योरपुर के काचन गांव समेत अन्य जगहों पर मुखबीर की सूचना पर छापेमारी की जा रही है । सूत्रों की माने तो अब तक छापेमारी में लगभग 17 ट्रेक्टर सागौन,साखू,खैर प्रजाति की लकड़ी बरामद की जा चुकी है। जिनकी कीमत लाखों में आंकी जा रही है । डीएफओ की टीम द्वारा लगातार की जा रही छापेमारी से वन माफिया समेत क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है ।लेकिन वन प्रेमी इससे काफी खुश हैं । ग्रामीणों का कहना है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के चांद प्रकाश जैन द्वारा की गई शिकायत पर लखनऊ की टीम द्वारा जांच की गई तो मामला सामने आ गया । ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग द्वारा पौधरोपण में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है । यदि उसकी भी जांच करा लिया जाय तो उसमें भी बड़ा घोटाला सामने आ सकता है ।
बहरहाल रेणुकूट वन प्रभाग लगातार छापेमारी कर अवैध कटान की गई लकड़ियों को बरामद करने में जुटा हुआ है। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर जो काम लखनऊ की टीम द्वारा की गई वह जांच स्थानीय वन अधिकारी द्वारा पहले क्यों नहीं किया गया । यदि समय रहते पहले से कार्रवाई की गई होती तो शायद जंगल बच जाता।

बहरहाल देखने वाली बात यह है कि लकड़ी तो बरामद किया जा रहा है । लेकिन लड़की को काटने वाले वन माफिया अभी भी गिरफ्त से बाहर है । जिनको सलाखों के पीछे भेजे बिना अवैध कटान को रोक पाना संभव नहीं है।


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