फैक्टरी में काम करने वाले खेतों में चला रहे फावड़ा

* मजबूरी का काम बन रहा मजदूरों के लिए मनरेगा
* वापस आए मज़दूरों के लिए रोजी रोटी का बड़ा संकट

मनोहर कुमार

चन्दौली। कोरोना का संक्रमण जिस तरह घातक होता जा रहा है उसी तरह रोजगार का संकट भी सुरसा की तरह मुंह बड़ा कर रहा है। लॉक डाउन के बाद घर वापस आये मजदूरों के लिए मनरेगा में मजबूरी का काम बन गया है।जो हाथ बड़े बड़े शहरों में मशीनों को आपरेट करने में लगे थे वह अब गांवों के खेतों में फावड़े चलाने को मजबूर हो गए। अभी उन्हें महानगरों की ओर वापसी की कोई सम्भावना भी नहीं दिख रही है। कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है।विष के अधिकांश देश इस महामारी से जूझ रहे हैं। भारत सहित अनेक देशों ने कोरोना के संक्रमण के फैलाव व प्रभाव को रोकने के लिए चरणबद्ध तरीके से लॉक डाउन किया था।भारत में अभी भी लॉक डाउन चल रहा है जो 30 जून तक चलेगा ।इसके साथ ही अनलॉक फेज वन चल रहा है।भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या दो लाख बाइस हजार के पार् है। वहीं जनपद चन्दौली में भी कोरोना अपना कहर ढा रहा है। लॉक डाउन के चलते विभिन्न राज्यों में काम करने वाले मजदूर परिवार के साथ वापस अपने घरों को वापस लौट आये। दिल्ली मुंबई में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है।हालांकि आर्थिक गतिविधियां धीरे धीरे गति पकड़ रही हैं। जबकि मजदूर पैदल,बस और श्रमिक ट्रेनों से वापस आ गए।लंबे अंतराल से चल रहे लॉक डाउन से मजदूरो के समक्ष रोजी रोटी का संकट खड़ा होता जा रहा है। मनरेगा उनके लिए संजीविनी बन रही है।लेकिन मजदूरो को सन्तुष्टि नहीं दे रही। महानगरों में काम कर गौवों को आर्थिक मजबूती देने वाले मजदूर अब परेशान हैं। जो मजदूर फैक्ट्रियों में अपने हाथों से बड़ी मशीन ऑपरेट करते थे अब खेतों में फावड़ा चलाने को विवश हैं।सरकार की ओर से उन्हें मनरेगा में काम करने की योजना बनाई है।लेकिन यह काम उनके लिए मजबूरी का बनता जा रहा है। अभी फिलहाल महानगरों की ओर लौटने की कोई सम्भावना प्रतीत नहीं हो रही है।



अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
Back to top button
error: Content is protected !!