कोटा ग्राम पंचायत में तिकड़ी का खेल खत्म, करोड़ों का घोटाला उजागर, FIR दर्ज

संजय केसरी (संवाददाता)

■ ग्राम प्रधान का एकाउंट सीज

■ त्रिस्तरीय समिति का होगा गठन

■ इसी साल होना है पंचायत चुनाव

■ चुनाव के पहले प्रधान को लगा करारा झटका

■ सबसे पहले जनपद न्यूज लाइव ने उठाया था भ्रष्टाचार का मुद्दा

फाइल फोटो

गुरमुरा । जहां एक तरफ शुक्रवार को सुबह जिले में 5 कोरोना मरीज मिलने के बाद हड़कम्प मचा हुआ था वही शाम होते-होते कोटा ग्राम पंचायत में करोड़ों के घोटाले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही पूरे जनपद में हड़कम्प मच गया । 113.89 लाख के गबन के आरोप में जिलाधिकारी के निर्देश पर चोपन थाने में प्रधान समेत 3 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करा दिया गया । FIR दर्ज होने के बाद जहां कोटा ग्राम पंचायत के ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गयी वहीं चोपन ब्लाक में हड़कम्प मच गया । कोटा ग्राम पंचायत हमेशा से चर्चा में रहा है । जिले के बड़े ग्राम पंचायतों में शामिल कोटा ग्राम पंचायत में प्रधान या सेक्रेटरी बनना हर किसी के किस्मत नहीं । लेकिन जब भी कोई नियुक्त हुए, हमेशा उसका कार्यकाल विवादों में ही रहा ।

चोपन थाने में दी गयी तहरीर के मुताबिक विकास खण्ड चोपन के ग्राम पंचायत कोटा में ग्राम पंचायत सदस्यों द्वारा ग्राम प्रधान, सचिव एवं जेई द्वारा करोड़ों की वित्तीय अनियमितता किया गया है । कोटा ग्राम पंचायत के लोगों द्वारा कई बार घोटाले को लेकर प्रदर्शन किया गया । इतना ही नहीं ग्रामीणों ने शपथ पत्र देकर जिलाधिकारी से जांच कराने की मांग की गई थी । जिसके क्रम में जनपद स्तर से परियोजना निर्देशक डी0आर0डी0ए की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर 48 कार्यों की जांच कराई गई। जांच टीम द्वारा पाया गया कि ग्राम पंचायत में बड़े पैमाने पर शी-शी रोड का निर्माण कागज पर पूर्ण दिखाया गया परन्तु मौके पर यह कार्य पूर्ण नही पाया गया।इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय गौराही में इंटर लॉकिंग खड़ंजा, बालिका पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बाउंड्रीवाल का निर्माण दिखा कर पूरा पैसा निकाला गया परन्तु कार्य अधूरा मिला। इसी तरह अम्माटोला में लाल बहादुर के घर से राम गुल्ली के घर तक इंटर लॉकिंग के कार्य पर 3.33 लाख व्यय किया गया परन्तु मौके पर कार्य नही पाया गया । इतना ही नहीं जांच टीम को प्राथमिक विद्यालय सरपतवा की पत्रावली ही नही मिली। इस प्रकार कमेटी द्वारा कुल 48 कार्य की जांच की गई और 113.89 लाख रुपये का कार्य नही मिला। उसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत की पत्रावलियों में कई कमियां पायी गयी हैं जिसमे तीन स्तर का फोटो ग्राफ कोटेशन टेंडर के कागज माप पुस्तिका आदि नही मिली । थाने में दी गयी तहरीर में बताया गया कि उक्त सभी कार्य ग्राम पंचायत द्वारा चतुर्थ राज्य वित्त एवं चौदहवाँ वित्त आयोग की धनराशि से कराया गया, जिसमें ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से अवर अभियंता के आधार पर भुगतान की कारवाही की जाती हैं। इस प्रकार प्रधान, सचिव आरहड़ अधिकारी हैं तथा अवर अभियंता संस्तुति अधिकारी हैं, इस प्रकार ग्राम पंचायत कोटा की ग्राम प्रधान मुरहिया देवी तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव ब्रिजेश सिंह तथा तत्कालीन अवर अभियंता लघु सिंचाई संजय कुमार दोषी हैं। जिनके विरुद्ध थाने में FIR करा दिया गया है ।

इस पूरे प्रकरण पर सीडीओ अजय द्विवेदी ने बताया कि साजिश के तहत कार्य किया जाता था । इसमें प्रधान, सेक्रेटरी व जेई की भूमिका संदिग्ध थी । ये सभी सिंडिकेट बनाकर बिना काम किये एमबी दिखाकर धन निकाल लेते थे । लेकिन जिलाधिकारी के निर्देश पर टीम गठित कर जांच कराई गई तो पूरा राज खुल गया और 1 करोड़ से अधिक का गबन सामने आया । सीडीओ ने बताया कि ग्राम प्रधान का एकाउंट सीज कर दिया गया है और त्रिस्तरीय समिति के गठन की प्रक्रिया चल रही है ।

बहरहाल कोटा ग्राम पंचायत में करोड़ों का घोटाला कोई पहली बार नहीं हो रहा, इसके पहले भी कोटा में कई भ्रष्टाचार उजागर हो चुके हैं । मगर हर बार कोर्ट का सहारा लेकर आरोपी बच जाया करते थे । लेकिन जिस तरह से जिलाधिकारी अब पिछले तीन वर्षों की जांच करा रहे हैं, ऐसे में उम्मीद है कि इस बार भ्रष्टाचारियों को कहीं से कोई राहत नहीं मिल सकेगा ।


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