गेंहू के बीज व दवा की अनुदान राशि न मिलने से किसान परेशान

विनोद कुमार (संवाददाता)

*वित्तीय वर्ष 2019-20 का है बकाया।
* सब्सिडी आधारित बीज खरीदने से कतरा रहे किसान।

शहाबगंज।सरकार के लाख प्रयास के बाद भी किसानों की समस्या खत्म होने कस में नहीं ले रही है।किसानों को सरकार द्वारा दिए जाने वाले सब्सिडी राशि की भुगतान में अधिकारियों की लेटलतीफी के कारण क्षेत्र के किसान सब्सिडी आधारित बीज खरीदने से कतराते दिख रहे है।स्थानीय राजकीय बीज गोदाम से धान के बीज की बिक्री शुरू कर दी गयी है लेकिन सत्र 2019-20 का गेहूं और दवा के सब्सिडी का पैसा अभी तक किसानों के खाते में नहीं आ सका है।जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।किसान कोरोना वायरस के
के भयंकर महामारी के बीच धान की नर्सरी डालने की तैयारी जोर-शोर से शुरू कर दिए हैं।वहीं राजकीय बीज गोदाम से किसानों का मोहभंग भी हो रहा है।जिसका कारण है किसानों की समस्या को अधिकारियों व बीज गोदाम पर तैनात कर्मचारियों द्वारा निस्तारण नहीं किया जाना।समस्या के निस्तारण न होने से किसानों के माथे पर चिन्ता की लकीरें खींच गयी हैं।वहीं आगामी बीज ब्रिकी के लक्ष्य को पुरा करने में समस्या साफ देखी जा रही है।सरकार ने भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए कृषि विभाग की योजनाओं में डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना लागू की है।जिसका उद्देश्य था किसानों को मिलने वाली छूट की धनराशि सीधे किसानों के खाते में भेजा जाय।इसके लिए बीज खरीदने के दौरान बीज के पूरे दाम का भुगतान किसान करेंगे और छूट की राशि उनके खाते में हस्तांतरित कर दिया जायेगा।लेकिन यह योजना भी धरातल पर फेल होती नजर आ रही है।वित्तीय वर्ष 2019-20 में राजकीय बीज गोदाम से लगभग 100 किसानों ने गेंहू का बीज 3300 रुपये प्रति कुंतल के दर से नवंबर व दिसम्बर में नकद भुगतान देकर खरीदा।वहीं खरपतवारनाशी दवा का भी 293 रुपये प्रति पैकेट की दर से खरीद किया।लेकिन खरीद के छ: माह गुजरने के बाद भी सब्सिडी की धनराशि किसानों के खाते में अब तक हस्तांतरित नहीं किया गया।जिसको लेकर किसानों में आक्रोश साफ देखा जा रहा है।कृषि विभाग के इस घोर लापरवाही पूर्ण कार्यप्रणाली का असर धान बीज की बिक्री में साफ देखा जा रहा है।यदि विभाग इसी तरह उदासीन बना रहा तो आने वाले दिनों में किसान राजकीय बीज गोदामों पर जाने से कतराने लगेंगे।वहीं किसान चन्द्र प्रकाश,देवेंद्र नरायण,योगेन्द्र,पिंटू मिश्रा ने कहां कि जब नगद भुगतान देने के बाद भी सब्सिडी के पैसे के लिए इंतजार करना पड़ेगा तो इससे अच्छा प्राईवेट दूकानों से ही बीज खरीदना मुनासिब होगा।वहीं राजकीय बीज गोदाम के इंचार्ज अजीत भारती ने कहा कि जिले पर बजट नहीं होने के कारण सब्सिडी का पैसा खाते में नहीं आ सका है।जल्द ही सब्सिडी किसानों के खाते में आ जाएगी।


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