रामसुंदर मौत प्रकरण की उठी मजिस्ट्रीयल जांच की मांग

धर्मेन्द्र गुप्ता (संवाददाता)

– मृतक के परिजनों से मिलकर बंधाया ढांढस

– पुलिस की कार्रवाई पर सपा ने उठाए सवाल ?

– मृतक के मामले में नहीं हुई परिजनों की सुनवाई

– तोड़फोड़ में पुलिस ने दिखाई फौरी कार्रवाई

विंढमगंज । विंढमगंज थाना क्षेत्र के पकरी गांव के कनहर नदी के समीप रहने वाला आदिवासी किसान के संदिग्ध मौत प्रकरण में सपा नेता जुबेर आलम ने मजिस्ट्रेटी जांच की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि अगर इस प्रकरण में अगर जिला प्रसाशन द्वारा मजिस्ट्रेटी जांच गठित नहीं कि जाती है तो सपा वृहद आंदोलन करेगी। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी किसान रामसुंदर का शव जब कनहर नदी से 23 मई की शाम बरामद हुई तो पीएम के बाद परिजनों को डेड बॉडी ले जाने के लिए क्यों दबाव बनाया गया? क्यों कहा गया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी? जबकि ग्रामीण मामले की जांच चाहते थे। पुलिस ने इस घटना में कोई मामला दर्ज नहीं किया। जबकि परिजनों सहित ग्रामीणों का आरोप था कि रामसुंदर की मौत प्राकृतिक नहीं बल्कि हत्या था। जब पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रामसुंदर की मौत नदी में डूबने से बताया गया तभी ग्रामीणों का गुस्सा फूटा जो वक्त की दुर्भाग्य पूर्ण घटना है। इस घटना से जाने अनजाने में साइट पर हंगामा हुआ जो जानबूझकर नहीं सिर्फ आक्रोश था। अगर पुलिस मामले में मुकदमा दर्ज की होती तो शायद यह घटना ही नहीं घटती।

उन्होंने पकरी ग्राम प्रधान मंजय यादव सहित अन्य निर्दोष ग्रामीणों के खिलाफ कई धाराओं में दर्ज मुकदमा की भर्त्सना की। इससे पूर्व सपा नेता जुबेर आलम ने आज पकरी गांव में मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उनका दर्द साझा किया और मामले की जानकारी ली। पीड़ित परिवार को ढांढस देते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए वे और उनकी पार्टी सड़क से लखनऊ तक आवाज उठाएगी।उन्होंने आरोप लगाया कि परिजनों के मुताबिक कनहर नदी किनारे इन आदिवासियों की जमीन थी और बालू घाट वाले बालू उठा रहे थे और वह विरोध करता था।

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