जरहां शौचालय घोटाला : डीएम के आदेश के बाद भी क्यों नहीं हुआ भ्रष्टाचारियों पर एफआईआर

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

■ जरहां शौचालय घोटाला से सम्बंधित महत्वपूर्ण चिट्ठी जनपद न्यूज Live के हाथ लगी

■ पिछले तीन सालों से सिर्फ हो रहा जांच पर जांच

■ हर बार जांच में साबित होता रहा शौचालय में घोटाला

■ जिलाधिकारी के आदेश के बाद क्यों बैठाई गयी नई जांच कमेटी

■ क्या स्वच्छता में घोटाले को दबाने की चल रही साजिश

■ मनरेगा के बाद सामने आ सकता है शौचालय में बड़ा घोटाला

■ ग्रामीणों का आरोप, उन्हें दिया जा रहा दबाव व लालच

■ योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस वाली सरकार में आरोप सिद्ध होने के बाद भी कार्यवाही न होने से खड़े हो रहे कई सवाल

■ क्षेत्रीय विधायक भी भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही के लिए लिख चुके हैं पत्र

सोनभद्र । म्योरपुर ब्लाक का जरहां ग्राम पंचायत इन दिनों न सिर्फ चर्चाओं में है बल्कि प्रतिष्ठा से जुड़ गया है। प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छता मिशन में भ्रष्टाचार का खुलासा होने के बाद से अटकलों का बाजार गर्म हो गया है । लोगों को इस बात का इंतजार है कि आखिर ऊंट किस करवट बैठेगा । मतलब कार्यवाही क्या होती है ? या फिर होगी कि नहीं ।

लेकिन इसी बीच जनपद न्यूज Live के हाथ लगी जिलाधिकारी के एक गोपनीय पत्र ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

15 मई 2020 को जिलाधिकारी के आदेश पर सहायक विकास अधिकारी ने जरहां में शौचालय घोटाले की जांच कर जो रिपोर्ट सौंपी थी । उसमें 314 शौचालय मौके पर नहीं पाया गया था । सहायक विकास अधिकारी ने जांच में 37.68 लाख रुपये के गबन का जिक्र किया था । जांच के बाद जिलाधिकारी ने 18 मई 2020 को एक पत्र सीडीओ को लिखा था । जनपद न्यूज live के हाथ लगी इस गोपनीय पत्र में जिलाधिकारी ने लिखा था कि वर्तमान प्रधान श्रीराम व तत्कालीन सचिव शैलेन्द्र सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर गबन की गई धनराशि की वसूली सुनिश्चित कराएं।

लेकिन अब तक कोई कार्यवाही तो नहीं हुआ बल्कि 23 मई को एडीओ पंचायत म्योरपुर ने पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि डीडीओ के नेतृत्व में एक बार फिर जांच टीम का गठन कर दिया गया है, जो जरहां में शौचालय की जांच करेगी । लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि जिस सहायक विकास अधिकारी ने 15 मई को जांच कर यह रिपोर्ट दिया था कि जरहां शौचालय में लगभग 37.68 लाख रुपये का घोटाला/गबन है ।

आखिर डीडीओ की अध्यक्षता में एक बार फिर उसी सहायक विकास अधिकारी को जांच टीम में शामिल करने का औचित्य क्या है ? यहां सवाल यह भी उठना लाजमी है कि क्या सहायक विकास अधिकारी की जांच से जिलाधिकारी संतुष्ट नहीं हैं ? यदि ऐसा था तो जिलाधिकारी ने 18 मई को ही सीडीओ को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज करने व गबन की धनराशि वसूल करने के लिए पत्र क्यों लिखा था?

अब लोगों में इस बात को लेकर चर्चा आम हो चली है कि जब जिलाधिकारी ने एफआईआर करने का लिखित आदेश दिया था तो एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुआ? लगभग 20 साल से म्योरपुर में जमे तत्कालीन सचिव व वर्तमान प्रधान को लेकर चौराहे-चट्टी पर तरह तरह की बातें हो रही है ।

अभी डीडीओ की अध्यक्षता वाली जांच टीम जांच कर रही रही है कि इसी बीच पूर्व प्रधान जरहां समेत दर्जन भर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर तत्कालीन सचिव शैलेन्द्र सिंह के खिलाफ शिकायती पत्र देकर हड़कम्प मचा दिया । शिकायत कर्ताओं ने कहा कि उन्हें जबरन पैसे देकर यह कहा जा रहा है कि कोई जांच करने आये तो बता देना कि सचिव साहब ने बनवाया है । कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने खुद के पैसे से शौचालय बनवाया था, अब उन्हें इस बात का दबाव दिया जा रहा है कि कोई जांच करने पहुंचे तो यह बताए कि यह शौचालय सचिव साहब ने बनवाया है ।

शौचालय की जांच इस कदर उलझती जा रही है कि ग्रामीण भी सकते में हैं । पिछले 2017 से चला आ रहा शौचालय का जिन्न हर दिन विकराल रूप लेता जा रहा है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है ।

लेकिन कुल मिलाकर जनपद न्यूज Live के हाथ लगी जिलाधिकारी के इस गोपनीय पत्र के खुलासे के बाद यह तो साफ हो गया है कि अंदरखाने में कुछ और ही खिचड़ी पक रही है । जिस तरह से 2017 से सब तक सिर्फ जांच पर जांच कराई जा रही है, कहीं पूरे भ्रष्टाचार को दाबने की कवायद तो नहीं । क्योंकि क्षेत्रीय विधायक हरिराम चेरो भी पत्र लिखकर कार्यवाही की मांग कर चुके हैं। विधायक हरिराम चेरो ने भी पत्र के माध्यम से सवाल खड़ा किया था कि आखिर भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही क्यों नहीं हो रही ।

बहरहाल मनरेगा घोटाले में भी शुरूआती जांच कुछ ऐसे चला था मगर कड़ी से कड़ी जुड़ने लगा तो भ्रष्टाचार 350 करोड़ से ज्यादे का निकला और अंततः अब जांच सीबीआई में हाथों में है ।


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