नागरिकों व किसानों के हाथ से बिजली छीन लेगा संशोधन कानून – वर्कर्स फ्रंट

जय प्रकाश (संवाददाता)

– देशव्यापी काला दिवस के समर्थन में सोनभद्र में राष्ट्रपति को भेजे गए पत्रक

अनपरा । केन्द्र सरकार द्वारा बिजली के निजीकरण के लिए लाया जा रहा संशोधन कानून किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों के हाथ से बिजली जैसा जिंदगी का महत्वपूर्ण अधिकार को छीन लेगा। इसके खिलाफ बिजली कर्मचारियों के काला दिवस का वर्कर्स फ्रंट और मजदूर किसान मंच के कार्यकर्ताओं ने समर्थन किया और इसे वापस लेने के लिए महामहिम राष्ट्रपति को पत्रक भेजा। अनपरा में वर्कर्स फ्रंट से जुड़ी ठेका मजदूर यूनियन के जिला मंत्री तेजधारी गुप्ता, मसीदुल्ला अंसारी, अशोक यादव ने प्रबंधन के माध्यम से ज्ञापन भेजा। पिपरी में ठेका मजदूर यूनियन के जिलाध्यक्ष कृपाशंकर पनिका, पूर्व सभासद नौशाद, मारी, प्रवीण कुमार मौर्य, बृजेश कुमार न अपर श्रमायुक्त विंध्याचल मण्ड़ल के द्वारा ज्ञापन भेजा गया। ओबरा में जिला संयुक्त मंत्री मोहन प्रसाद, उपाध्यक्ष तीरथराज यादव, चंद्रशेखर पाठक के नेतृत्व प्रबंधन के माध्यम से ज्ञापन दिया गया। राबर्ट्सगंज में मजदूर किसान मंच के नेता जितेन्द्र लकड़ा, जितेन्द्र गुप्ता और घोरावल में कांता कोल व श्रीकांत सिंह के द्वारा ज्ञापन दिए गए।
महामहिम को भेजे ज्ञापन में कहा गया कि कारपोरेट घरानों के हितों के लिए विद्युत क्षेत्र के निजीकरण का विद्युत संशोधन कानून-2020 राष्ट्रीय हितों के विरूद्ध है। इसमें सब्सिडी, क्रास सब्सिडी को खत्म कर दिया गया है जिसके कारण बिजली के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि होगी। किसानों को सिंचाई के लिए मिल रही सस्ती बिजली तो पूर्णतया खत्म हो जायेगी। दूसरे देशों में बिजली बेचने के प्रावधान को करने से पहले सरकार को देश में सबको सुलभ, सस्ती और निर्बाध बिजली की व्यवस्था करनी चाहिए। हालत यह है कि अनपरा के आसपास तक के गांवों में अभी बिजली नहीं पहुंची है। तीन लाख मेगावाट की क्षमता के सापेक्ष हम अभी महज 42% ही बिजली का उत्पादन कर पा रहे है। वैसे भी बिजली के निजीकरण के प्रयोग देश में विफल ही हुए है। आगरा के टोरंट पावर के प्रयोग से खुद सीएजी के रिपोर्ट के अनुसार बड़ा नुकसान सरकार को हुआ है। घाटे का तर्क भी बेईमानी है एक तरफ सस्ती बिजली बनाने वाली अनपरा जैसी इकाईयों में थर्मल बैकिंग करायी जाती है वहीं दूसरी तरफ कारपोरेट घरानों से महंगी बिजली खरीदी जा रही है। वितरण कम्पनियों के घाटे का भी सच यह है कि सरकार ने ही अपना लाखों-करोड़ों रूपया बकाया नहीं दिया। इसलिए ज्ञापन में महामहिम से बिजली जो जीने के अधिकार का हिस्सा है और संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत आयेगा उसकी रक्षा के लिए इस संशोधन बिल को वापस लेने की मांग की गयी है।

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