काम के अभाव में मुसीबत में कामगार

मनोहर कुमार (संवाददाता)

कोरोना व लॉक डाउन से कामों में आई है कमी
बाहर से आये मजदूर भी अब खोज रहे काम

चंदौली। कोरोना संक्रमण से जंग में कारगर हथियार बन कर सामने आए लॉक डाउन व सोसल डिस्टेंसिंग ने काफी कुछ बदल दिया है।लॉक डाउन फेज फोर का 31 मई को आखिरी दिन है।आगे सरकार की रणनीति क्या है । कल पता चलेगा।इस बीच विभिन्न राज्यों से वापस लौटे कामगार अब काम के लिए परेशान होंगें। बहुत से मजदूर कहीं न कहीं कोई न कोई काम की तलाश करेंगे।महानगरों में वापसी की अभी कोई सम्भावना नहीं हैं। अभी भी मजदूर वापसी कर रहे हैं।
भारत सहित विश्व के अधिकांश देश इस समय कोरोना के कातिल संक्रमण से जूझ रहे हैं।विश्व में विभिन्न देशों में 50 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हैं।भारत में ही एक लाख पैसठ हजार से ज्यादा लोग संक्रमण से जूझ रहे हैं।नये मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।धान के कटोरे में एक संक्रमित की मौत हो गई है।कोरोना से संक्रमित सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में पाए जा रहे हैं।उसके बाद दिल्ली में।दिल्ली व मुम्बई में सबसे ज्यादा मजदूर कामो में लगे थे।जो लॉक डाउन के बाद फेज थ्री में वापसी की है। चन्दौली सबसे ज्यादा संक्रमित मुम्बई से लौटने वाले हैं। मजदूरों की बापसी के बाद उनके समक्ष रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वैसे भी असंगठित मजदूर जो पहले से यहां है।उन्हें काम नहीं मिल पा रहा है।अधिकांश काम भवन निर्माण से सम्बंधित ही मिलता है।लॉक डाउन के बाद से इस पर रोक लगी है।इसके बाद कुछ सहूलियतें मिली है।लेकिन मैटेरियल महंगा होने का कारण व आय की कमी के चलते लोग भवन निर्माण में हाथ नहीं लगा रहे रहे हैं। गांवों में खेती बारी बन्द हैं।वापसी करने वाले मजदूरों के लिए काम मिलना भी एक मुसीबत बन रहा है। नगर में भी काम की तलाश में भी मजदूर आते है।शहरों में जो मजदूर हैं वह पहले से ही कार्यरत हैं।ऐसे में बाहर से आये मजदूरो के लिए काम मिलना एक मुसीबत बन रहा है।उन्हें वापसी की कोई सम्भावना भी नहीं दिखाई दे रही है।


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