बंगाली माता ने त्यागा अपना पार्थिव शरीर

राजीव दुबे (संवाददाता)

इनके पार्थिव शरीर को एक झलक पाने को बेकरार दिखे इनके अनुयायी

– अनुयायियों ने बंगाली माता के पार्थिव शरीर को किया भूमि समाधि

विंध्याचल । विंध्य क्षेत्र के सीता कुंड के पास स्थित सत भावना संप्रदाय आश्रम की संस्थापिका और कामाख्या सिद्धि प्राप्त तथा महान तांत्रिक के साथ-साथ विंध्य पर्वत पर एक महान व कठोर साधना से होकर गुजरी थी। यही नहीं अभी अभी कुछ वर्षों पहले जुना अखाड़ा से भी जुड़ी थी।
बताया जाता है कि बंगाली माता (मलिना भौमिक) का मूल निवास कोलकाता के हावड़ा खरदा नामक स्थान से थी वहां से वह पहले नेपाल और फिर केदारनाथ पहुंची और वहां सबसे पहले कुछ दिनों तक भिक्षा मांगकर रहती थी। वहां से 1990 में मां विंध्यवासिनी के धाम में दर्शन पूजन करने के लिए अाई थी और 15 मिनट सीता कुंड में रुकी थी इसके बाद वह एक वर्ष बाद जुलाई 1991 पुनः विंध्याचल के गेरुआ तालाब के पास स्थित कपाली बाबा के आश्रम में रहने लगी कुछ वर्षों तक रहने के बाद वह सीता कुंड के सीढ़ी के ऊपर बाएं तरफ अपना आश्रम का निर्माण किया इस दौरान न जाने कितने लोग इनके शरण में आते रहे और सबका कार्य सिद्ध होता गया धीरे धीरे इनके हजारों अनुयायी बनते गए और इनके आश्रम में भक्तों और फरियादों की भीड़ लगने लगी।इस प्रकार से बंगाली माता दिन प्रतिदिन इस विंध्य पर्वत पर कठोर साधना भी करती रही।

परिजनों को सूचना दिया गया लेकिन लॉक डाउन होने की वजह से इनके परिवार से कोई भी नहीं आ सका था।

इनके देहावसान कि सूचना इनके परिजनों को दे दिया गया था जो वीडियो कॉलिंग करके बंगाली माता के पार्थिव शरीर का दर्शन कर सके। इनके परिवार में चार बच्चें और तीन पुत्रियां थीं, जो कभी कभी इनके पास आ जाते थे।



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