सोनभद्र में मनरेगा के बाद अब शौचालय घोटाला, जाँच रिपोर्ट से हुआ खुलासा

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

37लाख 32 हजार रुपये का है पूरा घोटाला

कई बार हो चुकी है जांच

हर बार जांच के बाद भी नहीं हुई कोई कार्यवाही

आखिर किसके दबाव में नहीं हो रही कार्यवाही

जीरो टॉलरेंस वाली योगी सरकार में दुद्धी विधायक का पत्र भी बेअसर

★ जनपद न्यूज़ live के हाथ लगी जाँच रिपोर्ट

सोनभद्र । जनपद सोनभद्र में स्वच्छ भारत मिशन में बड़ा घोटाला सामने आया है । प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘शौचालय’ में बड़ी गड़बड़ी सामने आने से जिला प्रशासन भी हैरान है । पिछले 2017 से म्योरपुर के जरहां में हुए शौचालय घोटाले का जिन्न को सक्षम अधिकारियों ने दबाकर रखा था लेकिन इन दिनों जिलाधिकारी ने समीक्षा बैठक में शौचालय निर्माण में सुस्ती दिखाए जाने को लेकर कार्यवाही की तो म्योरपुर ब्लाक जरहां में हुए शौचालय घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया। जिलाधिकारी ने सहायक विकास अधिकारी से एक बार फिर ताजा रिपोर्ट मांगी, जिसके क्रम में सहायक विकास अधिकारी ने 15 मई को एक जांच रिपोर्ट
उच्च अधिकारियों को सौंपा। उसमें साफ लिखा था कि 314 शौचालय नहीं बने हैं जिसका धन गबन कर लिया गया ।

सूत्रों की माने तो इस रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी बेहद नाराज हुए और जिलाधिकारी ने जांच के लिए एक टीम गठित कर दी।

लेकिन मजे की बात यह है कि जो टीम गठित किया गया है, उसमें उसी सहायक विकास अधिकारी को रखा गया है जिसने अभी हाल ही में 15 मई को अपनी जाँच रिपोर्ट सौंपी थी। क्षेत्रीय लोग इस बात को लेकर हैरान है कि आखिर शौचालय में गबन करने वाला की पहुँच कितनी ऊँची है। चर्चा इस बात को लेकर भी है कि आखिर तत्कालीन सचिव व प्रधान पर लगभग 314 शौचालय न बनवाने व गबन करने का आरोप है अब तक कार्यवाही क्यों नहीं हुई ? बड़ा सवाल यह है कि जब लगभग 37 लाख 32 हजार के इस घोटाले की जानकारी जिले में सभी आलाधिकारियों को है मगर अब तक कार्यवाही क्यों नहीं हो सकी?

जीरो टॉलरेंस वाली योगी सरकार में लाखों रुपये के गबन के इस मामले को लेकर क्षेत्रीय विधायक हरिराम चेरो ने भी पत्र लिखकर कार्यवाही की मांग कर चुके हैं। दुद्धी विधायक द्वारा मुख्य विकास अधिकारी को लिखा गया कि आखिर भ्रष्टाचार साबित होने के बाद भी जरहां के तत्कालीन सचिव पर कार्यवाही क्यों नहीं हुई?

बतादें कि सोनभद्र में मनरेगा घोटाले की जांच अभी भी सीबीआई द्वारा की जा रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में जिस तरह से सेंधमारी व भ्रष्टाचार हो रहा है, वह न सिर्फ प्रोजेक्ट के लिए बल्कि समाज के लिए भी घातक है।

शिकायतकर्ता पन्नालाल ने बताया कि “वो 2017 से वे शौचालय में भ्रष्टाचार को लेकर शिकायत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर तमाम जगहों पर लिखा पढ़ी की गई, जांच भी हुआ लेकिन कार्यवाही नहीं हुई। हर बार रिकवरी व एफआईआर की बात जांच अधिकारी करते हैं लेकिन हर बार मामला दबा दिया जाता है।”

बहरहाल जरहां शौचालय घोटाले में साबित होने के बाद भी कार्यवाही न किया जाना कहीं न कहीं प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट को डैमेज पहुंचाने जैसा है? अब देखने वाली बात यह हैं कि गठित टीम की जांच रिपोर्ट के बाद कितना डैमेज कंट्रोल कर पाती है।


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