जंगल को माफिया से नहीं, वन कर्मियों से खतरा, पढ़े पूरी खबर

संजय केसरी (संवाददाता)

गुरमुरा । सोनभद्र की प्राकृतिक छटा व यहां की खनिज संपदा को देखकर कभी पंडित जवाहर लाल नेहरू में कहा था कि सोनभद्र देश का स्विटरजरलैंड बनेगा । मगर धीरे-धीरे सोनभद्र में प्राकृतिक सौंदर्यता घटने लगी और खनिज संपदा पर खनन माफियाओं की गिद्ध निगाह पड़ गयी । जिसके कारण आज सोनभद्र अवैध खनन व वनों के कटान को लेकर जाना जाता है ।
तीन दिनों तक मुख्य वन संरक्षक लखनऊ समेत उनकी टीम ने म्योरपुर में गहन जांच की । काचन के जंगल में वनों के अवैध कटान को लेकर जांच करने पहुंची लखनऊ की टीम भी हैरान थी । उन्होंने भी माना कि बेशकीमती लकड़ियों का इतने बड़े पैमाने पर अवैध कटान पहले कभी नहीं देखा । वन माफिया विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलकर म्योरपुर ही नहीं पूरे सोनभद्र में अवैध कटान का खेल खेलते हैं ।
ताजा मामला गुरमुरा क्षेत्र का है । जहां वन माफियाओं की नजर जंगल के वेशकीमती लकड़ियों पर हैं । वैसे तो यह क्षेत्र पहले भी वेशकीमती लकड़ी के कटान को लेकर चर्चा में रहा हैं । लेकिन लॉक डाउन के दौरान माफियाओं ने इस महामारी का जबरदस्त फायदा उठाया है ।

जानकारी के अनुसार इन दिनों ओबरा वन प्रभाग के सेक्सन गुरमुरा के वन रेंज परासपानी के अंतर्गत गुरमुरा व अबाड़ी रोड के जंगलों में इस दिनों वन माफियाओं की चांदी कट रही हैं। क्योंकि इस समय पूरा प्रशासन इस वैश्विक महामारी से निपटने में लगा हैं, ऐसे में वन माफिया बिना किसी डर भय के वेशकीमती पेड़ो को काट रहे हैं।

आपको बतादूँ कि गुरमुरा से अबाड़ी रोड में माफियाओं ने एक पेड़ को अपना निशाना बनाया लेकिन किन्ही कारणों से सफल नहीं हो सके तो अधूरे पर ही छोड़ कर चले गए । अब वह पेड़ लोगों के लिए जान का दुश्मन बन गया है । वह हर दिन खतरे को दावत दी रहा हैं । तस्वीरों में भी साफ देखा जा सकता है कि यदि कभी पेड़ गिरा तो कोई भी अप्रिय घटना घट सकती हैं । लोगों का कहना है कि अध कटा पेड़ किसी भी वक्त गिर सकता हैं क्योंकि उस पेड़ के निचे के हिस्से को काटा जा चुका हैं।

इस मामले को लेकर क्षेत्र के फारेस्ट गार्ड को लगभग दो हफ्ते पहले ही सूचना दी जा चुकी हैं परंतु अभी भी वह पेड़ उसी तरह खड़ा है ।जहाँ एक तरफ सरकार हर साल मुहिम चला कर पेड़ों को लगाने का काम करती हैं ताकि जंगल हराभरा रहे । वहीं विभाग में तैनात कुछ अधिकारी व कर्मचारी पैसों के लालच में वन माफियाओं के साथ मिलकर बेशकीमती लकड़ियों का अवैध कटान कर उसकी तस्करी करा रहे हैं ।

बहरहाल एक तरफ सरकार पौध रोपण का रिकार्ड बनाने में जुटी है वहीं दूसरी तरफ वन माफिया जंगल को साफ करने का रिकार्ड बनाने में जुटा है ।

बड़ा सवाल यह है कि अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए जलावनी लकड़ी ले जाने वाले गरीब पर जिस तरह से वन विभाग के अधिकारी मुकदमा लिख कर अपनी पीठ थपथपाते हैं । वहीं बेशकीमती पेड़ों के कटान पर उन्हीं अधिकारियों के सुर बदले-बदले नजर आते हैं ।



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