सादगी के साथ मनाया गया ईद, गले मिलने की बात तो दूर, हाथ भी नहीं मिले

रमेश यादव (संवाददाता)

◆ सबके मुंह से एक ही जुमला-ऐसी ईद ज़िंदगी में नही मनाई

दुद्धी। “ईद के दिन भी कोरोना ने मजबूर कर दिया तकदीर से, रो पड़े गले मिलकर हम आपकी तस्वीर से” कुछ ऐसा ही हाल-ए-दिल रहा इस साल की ईद में। कॅरोना महामारी के चलते ईद के दोगाने की जगह ज़िंदगी मे पहली बार नफ़्ल की नमाज अदा करने वाले मुस्लिम बंधुओं को एक ओर जहां ईद की नमाज से महरूम हो जाने की कमी खल रही थी वहीं नमाज बाद कोई सामने पड़ जाता तो ह-हा कर गले मिलने की बात तो दूर हाथ भी न मिला पाने का मलाल दिल में ही रह जाता। वैश्विक महामारी कॅरोना ने 2 मीटर दूर से ही ईद मुबारक का जुमला पेश करने पर मजबूर कर दिया।नए परिधानों में यदा कदा लोग ही नजर आए। हर आदमी के दिल में महामारी का खौफ तो चेहरे पर उदासी का सबब कॅरोना ने डाल रखा था।

हर साल चाँद रात की देर रात व ईद की अलसुबह से ही बाजार गुलजार रहते थे। इस साल ऐसा कुछ नज़ारा देखने को नही मिला। निर्धारित वक्त के मुताबिक सुबह 8 बजे जामा मस्जिद में पेश ईमाम हाफिज हाजी सईद अनवार की कयादत में नमाज कायम होने के बाद लोग 8.30 से अपने-अपने घरों में नमाज अदा किए।नमाज बाद भी प्रचंड गर्मी व लॉक डाउन के मद्देनजर बहुत कम ही लोग घरों से निकले। कुछ जो निकले तो सीधे कब्रिस्तान जाकर अपने मरहुमीन के कब्रों पर फातेहा पढ़ पुनः घरों में ही कैद हो गए। दोपहर तक तेज धूप के कारण सडकों पर जनशून्यता देखने को मिली।

ईद की नमाज सकुशल सम्पन्न कराने के लिए अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह, उप जिलाधिकारी सुशील कुमार यादव, रेंजर दिवाकर दुबे कोतवाली में स्थापित कंट्रोल रूम से दुद्धी व आसपास के ग्रामीण अंचलों पर पैनी नजर रखे रहे, वहीं पुलिस उपाधीक्षक संजय वर्मा, प्रभारी निरीक्षक अशोक सिंह, क्राईम इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश यादव अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों व पीएसी के साथ जामा मस्जिद, ईदगाह, क़ब्रिस्तान सहित पूरे नगर में चक्रमण करते रहे।



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