अलविदा अलविदा ऐ माहे रमज़ान

* रमजान का आखरी जुमा अलविदा आज।

* घरों में ही अलविदा की होगी नमाज।

फ़ैयाज़ खान मिस्बाही

ग़ाज़ीपुर (ब्यूरो) । रमजान का पाक महीना अब खत्म होने वाला है. ईद के चांद से पहले जो आखिरी जुमा होता है, उसे अलविदा जुमा कहते हैं। हर बार के अलविदा और इस बार के अलविदा में बहुत फर्क है, हर बार जहाँ सारे मुस्लिम मस्जिदों में जाकर अलविदा की नमाज़ पढ़ते थे वही इस बार लोकडाउन की वजह से अलविदा की जगह ज़ोहर की नमाज़ घर पर पढ़ी जाएगी। समाजसेवी हाजी शमीम खान का कहना है कि इस नमाज़ में तमाम मुसलमानों को चाहिए कि इस महामारी से निजात के लिये अपने रब से खूब खूब दुवा करें, और अपने मुल्क की सलामती के लिए भी दुवा मांगे। अलविदा का मतलब रमजान के पाक महीने की विदाई है. इस्लाम में रमजान के अखिरी जुमे यानी अलविदा को सबसे अफजल करार दिया गया है. यूं तो जुमे की नमाज पूरे साल ही खास होती है लेकिन रमजान के आखिरी जुमे अलविदा की नमाज अफ़ज़ल मानी जाती है.
हर मुसलमान के लिए अलविदा की नमाज बेहद अहम और खास होती है. अलविदा को छोटी ईद भी कहा जाता है. अलविदा की नमाज के बाद सच्चे दिल से मांगी गई हर जायज दुआ अल्लाह कुबूल करता है और अपने बंदों को हर गुनाह से पाक-साफ कर देता है.
अलविदा के दिन तमाम मुसलमान गुस्ल करके पाक साफ कपड़े पहनते हैं. नमाज अदा करते हैं. कुरान की तिलावत करते हैं.आदमी हमेशा की तरह मस्जिदों में नमाज अदा करते हैं और महिलाएं घरों में. लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते सभी मस्जिदें बंद हैं. ऐसे में इस बार अलविदा की जगह ज़ोहर की नमाज आदमी घरों में ही पढ़ेंगे. अलविदा को रमजान के पाक महीने की विदाई के तौर पर भी जाना जाता है. कई लोग रमजान की विदाई होने पर इस दिन गमगीन भी हो जाते हैं.



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