मोदी सरकार के राहत पैकेज पर RBI डायरेक्टर ने उठाये सवाल

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक डायरेक्टर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे सतीश काशीनाथ मराठे ने कोरोना से निपटने के लिए मोदी सरकार के राहत पैकेज पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि तीन महीने का मोरेटोरियम काफी नहीं है और एनपीए में नरमी को राहत पैकेज का हिस्सा होना चाहिए था ।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘राहत पैकेज अच्छी और प्रगतिशील सोच वाला है, लेकिन यह अर्थव्यवस्था को उबारने में अग्रिम योद्धाओं के रूप में बैंकों को शामिल करने के मामले में विफल रहा है । तीन महीने का मोरेटोरियम पर्याप्त नहीं है । एनपीए, प्रोविजनिंग में नरमी आदि राहत पैकेज का हिस्सा होना चाहिए था ताकि भारत को एक बार फिर तरक्की के रास्ते पर ले जाया सके।’

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के राहत पैकेज से मांग बढ़ने की उम्मीद कम है, क्योंकि इसमें सप्लाई साइड पर जोर है ।

मराठे ने बैंक ऑफ इंडिया से अपने बैंकिंग करियर की शुरुआत की थी । वह 2002 से 2006 तक द यूनाइटेड वेस्टर्न बैंक के चेयरमैन एवं सीईओ और इसके पहले 1991 से 2001 तक जनकल्याण सहकारी बैंक लिमिटेड के सीईओ भी रहे । वह सहकारी क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ सहकार भारती के संस्थापक सदस्य हैं । यह असल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा एक स्वयंसेवी संगठन है ।

गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते यह ऐलान किया था कि कोरोना से प्रभावित देशवासियों और अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये का राहत पैकेज दिया जाएगा । इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार पांच दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई ऐलान किए थे, जिनमें एमएसएमई को 3 लाख करोड़ रुपये का लोन देने का प्रस्ताव भी था ।

पीएम नरेंद्र मोदी ने इस पैकेज का ऐलान करते हुए कहा था कि यह जीडीपी के करीब 10 फीसदी का होगा । लेकिन जानकार कहते हैं कि इसमें मॉनिटरी पैकेज ज्यादा है और फिस्कल पैकेज में कई पहले के ऐलान ही लागू किए गए हैं ।

पीएम मोदी ने इसे आत्मनिर्भर भारत पैकेज नाम दिया है । पीएम मोदी का यह पैकेज इस मामले में ऐतिहासिक है कि 20 लाख करोड़ रुपये का यह अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक पैकेज है ।


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