हद हो गयी लापरवाही की, जिला प्रशासन को स्वैब जांच की नही थी जानकरी

फ़ैयाज़ खान मिस्बाही (ब्यूरो)

गाजीपुर। जिला प्रशासन की थोड़ी सी लापरवाही जिले में कोरोना महामारी के प्रकोप में झोंक दे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं। गंभीर माने जाने वाले जिन संदिग्धों के स्वैब जांच को भेजे गए थे जिला प्रशासन को उनका पता तक नहीं था, जबकि उन्हें हर हाल में न सिर्फ क्वारंटाइन सेंटर में रखना है बल्कि उनकी बराबर मानीटरिग भी करनी होती है। बहरहाल, रातभर हांफने के बाद मोबाइल फोन से एक ही परिवार के उन सातों लोगों का लोकेशन बुजुर्गा के रामपुर जीवन गांव का मिला जिसे जिम्मेदारों ने प्रीतम नगर का बताया था। आखिर पांच दिन तक किसकी निगरानी जिला प्रशासन द्वारा की जा रही थी कौन बताएगा।
बीते 14 मई को मुंबई से आए प्रवासियों का स्वैब 15 मई को जांच के लिए वाराणसी भेजा गया था। बीते 20 मई की देर शाम परिवार के सात सदस्यों की रिपोर्ट पाजिटिव आने के बाद जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीम नगर के प्रीतम नगर कालोनी पहुंचकर संक्रमितों के घर की तलाश में जुट गई। वहां उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो जिम्मेदारों के होश फाख्ता हो गए। इसके बाद उनके द्वारा दर्ज कराए गए मोबाइल नंबर को ट्रेस करने के बाद मेडिकल टीम एंबुलेंस लेकर रामपुर जीवन गांव पहुंची और सभी को रेलवे जोनल ट्रेनिग सेंटर लाया गया। जहां से अन्य संक्रमितों के साथ जौनपुर भेजा गया। गांव को अब सील करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।


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