डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई है नई वेब सीरीज ‘illegal’ की समीक्षा

बॉलीवुड में कई बेहतरीन कोर्ट ड्रामा फिल्में देखने को मिली हैं. फिर चाहे वो पिंक हो, सेक्शन 375 हो या हो जॉली एलएलबी. सभी फिल्मों को दर्शकों ने खासा पसंद किया. कोर्ट ड्रामा फिल्मों की खासियत होती है कि उन में जबरदस्ट ट्विस्ट एंड टर्नस देखने को मिलते हैं, सस्पेंस की भरमार होती है और कुछ होते हैं इंटेंस कोर्ट सीन्स. अब बड़े पर्दे पर तो नहीं लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई है नई वेब सीरीज illegal जिसका डायरेक्शन साहिर रजा कर रहे हैं. सीरीज में पीयूष मिश्रा जैसे कद्दावर अभिनेता को भी रख लिया गया है. ऐसे में उम्मीद तो काफी है. आइए जानते हैं कैसी बनी है ये नई वेब सीरीज illegal

फिल्म की कहानी:
देश का नंबर वन वकील जनार्दन जेटली (पीयूष मिश्रा) लगातार बड़े-बड़े हाई प्रोफाइल केस जीत रहा है. वकीलों के बीच उसकी इज्जत और शौहरत काफी ज्यादा है. उसकी एक बड़ी कंपनी भी चल रही है जहां कई काबिल वकील काम करते हैं और केस लड़ते हैं. वहीं दूसरी तरफ एक कामयाब वकील बनने के सपने देख रही है निहारिका सिंह (नेहा शर्मा) जिसे पूरी मीडिया द मैड लॉयर के नाम से जानती है. अब उसे मैड लायर क्यों कहते हैं ये तो आपको सीरीज देखते समय खुद समझ आ जाएगा. अब किसी तरह निहारिका को जनार्दन जेटली की फर्म के साथ जुड़ने का मौका मिल जाता है. वहां उसे मेहर सलाम नाम की कातिल का केस सौपा जाता है. अब केस बस ये है कि मेहर लंबे समय से जेल में कैद है, फांसी की सजा भी सुनाई गई है लेकिन फांसी हो नहीं रही है. अब जनार्दन जेटली ने इसी सिलसिले में याचिका डाली है और ये फांसी टालने की मांग की है. इस केस की सारी जिम्मेदारी निहारिका को दे दी जाती है.

अब निहारिका इस केस पर आगे बढ़ती ही है कि पता चलता है कि एक हाई प्रोफाइल रेप का मामला सामने आता है. ऐसा मामला जिसके चलते जनार्दन की कंपनी की इज्जत तक दांव पर लग जाती है. निहारिका को यही केस लड़ने के लिए मनाया जाता है. आगे की कहानी बस इस बात के इर्द गिर्द घूमती है कि कैसे उसूलों को दांव पर लगाकर केस जीता जा सकता है. कैसे सच को तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है. सवाल ये है कि क्या निहारिका ये दोनों केस जीत पाएगी. दूसरे वकीलों की तरह निहारिका भी क्या ‘illegal’ तरीके से केस अपने पक्ष में मोड़ेगी या वो अपने सिद्धांतों पर टिकी रहेगी. illegal वेब सीरीज देख इन सभी सवालों का जवाब मिल जाएगा.

सभी मसालों की मात्रा स्वाद अनुसार हो तो खाना स्वादिष्ट बन जाता है. खाने का मजा बढ़ जाता है. लेकिन एक मसाला भी कम ज्यादा रह जाए तो समझ जाइए आप वो पकवान खा तो लेंगे लेकिन वो स्वाद गायब रहेगा. ऐसा ही कुछ देखने को मिला साहिर रजा की वेब सीरीज illegal के साथ. इस सीरीज में मुद्दों की भरमार है. कई जगह दिमाग दौड़ाने की कोशिश की गई है. कोर्ट ड्रामा भी दिखाना है,कुछ वकीलों के अनैतिक तरीके भी दिखाने है, इच्छामृत्यु का मुद्दा भी उठाना है, अफेयर भी होना चाहिए. अब illegal में ये सब दिखाया गया है लेकिन यही पता चलता है कि मजबूत और कमजोर कहानी में क्या फर्क होता है.

मजबूत कहानी एक ही जगह कई मुद्दे उठा सकती है लेकिन सभी के साथ न्याय करती पाई जाती है, वही कमजोर कहानी ये मुद्दे उठाती जरूर है लेकिन किसी की भी गहराई में नहीं जाती. illegal के बारे में यही कहा जाएगा. कमजोर कहानी इस सीरीज की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर सामने आई है.

फिल्म में एक्टिंग:
कहानी कमजोर जरूर है लेकिन उसे कुछ हद तक संभालने में कामयाब रही है कलाकारों की एक्टिंग. इस सीरीज में नेहा शर्मा निहारिका सिंह के रोल में हैं. ये कहना गलत नहीं होगा कि इस सीरीज में उनकी एक्टिंग जबरदस्त है. अगर ये भी कह दिया जाए ये उनका अब तक का सबसे बेहतरीन काम है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. एक वकील के रूप में नेहा ने बेहतरीन काम दिखाया है. उनकी डायलॉग डिलीवरी की भी तारीफ की जानी चाहिए.

वहीं illegal में परिपक्व अभिनेता पीयूष मिश्रा भी काम कर रहे हैं. जनार्दन जेटली के रूप में उनका काम बढ़िया कहा जाएगा. उन्होंने ज्यादा कुछ करने की कोशिश नहीं की है, कम एक्टिंग के जरिए ही उन्होंने अपने किरदार के साथ न्याय कर दिया है. लेकिन पीयूष मिश्रा का काम तो अच्छा रहा है लेकिन इस सीरीज में उन्हें ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया गया. उनका रोल काफी सीमित दायरे में रहता दिखा है. सीरीज में कुब्रा सैत ने मेहर सलाम का किरदार निभाया है. ये रोल जितना अलग है, उनकी एक्टिंग भी उतनी ही बेहतरीन रही है. एक कैदी के दर्द को उन्होंने बखूबी दिखाया है.

लंबे समय बाद दीपक तिजोरी ने भी कमबैक किया है. वो सीरीज में निहारिका के पिता बने हैं, लेकिन उनके किरदार के साथ कई ऐसे रहस्य जुड़े हैं जो कहानी को पूरी तरह बदल देंगे. वैसे दीपक तिजोरी का काम ठीक रहा है. उन्हें जितना करने को कहा गया, उतना उन्होंने तो कर ही दिया है. illegal में रेप पीड़िता के वकील बने हैं सत्यदीप मिश्रा. उनका रोल छोटा जरूर कहा जाएगा लेकिन असरदार है. कम स्क्रीनस्पेस में भी वो अपना प्रभाव छोड़ते दिखे हैं.

फिल्म में डायरेक्शन:
साहिर रजा के निर्देशन में बनी illegal कई पहलुओं पर कमजोर साबित हुई है. कहानी कमजोर है ये तो आपको बता ही दिया गया है, इसके अलावा डायरेक्शन भी खास प्रभावी नहीं है. यहां भी कई कमजोरियां सामने आई हैं. सबसे बड़ी चूक तो यही कही जाएगी कि इंटेंस कोर्ट ड्रामा मिसिंग है. जो सीन्स देखने के लिए दर्शक पूरे 10 एपिसोड तक इंतजार करते हैं, वो देखऩे को नहीं मिलता. ट्रेलर को देख पता चल जाता है कि एक मौके पर नेहा और पीयूष मिश्रा के बीच कोर्ट में जोरदार बहस भी होती है.

लेकिन शायद वो सीन सिर्फ ट्रेलर तक ही सही था, क्योंकि असल में वही सीन सबसे ज्यादा फीका कहा जाएगा. ना कोई रोमांच, ना कोई तगड़े डायलॉग और ना ही सस्पेंस. illegal का क्लाइमेक्स भी बेस्वाद रहा है. क्लाइमेक्स पर पहुंचने के बाद ही ये पता चलता है कि डायरेक्टर साहब दिखाना तो काफी कुछ चाहते थे लेकिन वो दिखा कुछ नहीं पाए. शायद किसी एक मुद्दे पर ही ठीक से फोकस करते तो ज्यादा मजा आता.

लॉकडाउन के बीच टाइम कांटने के लिए तो आप कुछ भी देख ही सकते हैं. illegal कोई बहुत कमोजर या खराब सीरीज नहीं है, कोशिश की तो तारीफ होनी चाहिए, बस ये है कि आपको कुछ भी नया ऑफर नहीं किया जाएगा. सीरीज से ज्यादा उम्मीद लगाके बैठना भी बेमानी ही होगी.


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