‘कोरोना काल’ में किस्मत के मारे हैं ‘के एम’

* किसानों को लागत का भी नहीं निकल रहा मूल्य

* वापसी के बाद रोजगार को तरस रहे मजदूर
के (किसान) एम (मजदूर)

मनोहर कुमार (वरिष्ठ संवाददाता)

चन्दौली। कोरोना संक्रमण के चलते इस समय देश भर में लॉक डाउन फेज फोर चल रहा है। इस फेज में काफी सहूलियतें मिली है। लॉक डाउन के इस दौर में सबसे ज्यादा परेशान (के एम) हैं।देश के रीढ़ कहे जाने वाले दोनों पहिये किस्मत के मारे हो गए है। कोरोना काल में लॉक डाउन के चलते मजदूर घर वापस हो रहे हैं।तो किसानों को उनकी उपज का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है।दोनों के लिए अर्थ संकट खड़ा हो रहा है। संसार के अधिकांश देश इस समय कोरोना के कहर से कराह रहे हैं।विभिन्न देशों में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ी है। हजारों की मौत हो गई है। भारत भी कोरोना के संक्रमण से अछूता नहीं है। देश में एके लाख से अधिक कोरोना रोग संक्रमित हैं। इसमें उपचार से कई ठीक भी हो गए।सामाजिक दूरी बनाए रखने के उद्देश्य व कोरोना वायरस के प्रभाव व फैलाव को रोकने के लिए इस समय दो महीने से चार चरणों मे लोक डाउन किया गया।इस समय लॉक डाउन फेज फोर चल रहा है। इस फेज में काफी सहूलियत दी गई है। लेकिन किस्मत के मारे ‘के एम ‘हैं। किसानों के लिए कोरोना संक्रमण काल ने दुश्वारियों का अंबार लगा दिया है। गेहूं की कटाई हो गया है। किसान खेतों में सब्जी उगाए हैं।इस समय सब्जी के दाम उछाल मार रहे होते हैं।लेकिन लॉक डाउन के चलते बहुत सी गतिविधियों पर रोक लगी है। ऐसे में सब्जी उत्पादकों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। आज सब्जियों के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं।किसानों का लागत भी नहीं मिल रहा है। वह पानी का भी दाम नहीं पा पा रहा है। सब्जियों के दाम बढ़ नहीं रहे हैं।गांव से शहर लाकर बेचने पर भी लाभ नहीं हो रहा।ऐसे में किसान परेशान हैं।उधर मजदूरों का पलायन अपने घरों की ओर हो रहा है।दूसरे राज्यों में कमा कर अपने व अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले मजदूर लॉक डाउन के चलते अपने घर वापस आ रहे हैं। उनके लिए काम व रोजगार एक संकट खड़ा हो रहा है।इस समय किसानी का काम बन्द है। हुनरमंद को उनके अनुसार काम मिल नहीं पाएगा। इस दौरान उनकी जमा पूंजी ही जीवन यापन में खर्च हो रही है।अब भी मजदूर वापसी कर रहे हैं।ऐसे में ‘के एम’ कोरोना काल मे किस्मत के मारे हैं।इनका कोई पुरसाहाल नहीं है।


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