इस व्रत के प्रभाव से सौभाग्यवती महिलाओं की मनोकामना होती हैं पूर्ण

ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर सुहागिन महिलाओं द्वारा वट सावित्री व्रत रखा जाता है। इस व्रत के प्रभाव से सौभाग्यवती महिलाओं की मनोकामना पूर्ण होती है। उनका सौभाग्य अखंड रहता है। ज्येष्ठ अमावस्या को दान पुण्य, पितरों की शांति के लिए सौभाग्यशाली दिन माना जाता है। ज्येष्ठ अमावस्या को शनि देव की जयंती के रूप में मनाया जाता है।

अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। अमावस्या वह दिन है जो पूर्वजों के प्रति आपका सम्मान दिखाता है और उनका आशीर्वाद प्रदान करता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। अमावस्या पर उपवास करने से पिछले जन्म के पापों से भी मुक्ति मिलती है। ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर वट सावित्री व्रत रखने से महिलाओं की अखंड सौभाग्य की कामना पूर्ण होती है। इस व्रत में सूर्यदेव को अर्घ्य देकर बहते जल में तिल प्रवाहित करने चाहिए। इसके पश्चात वट वृक्ष में जल का अर्घ्य दिया जाता है। वट वृक्ष की जड़ में भगवान ब्रह्मा, तने में भगवान श्रीहरि विष्णु व डालियों, पत्तियों में भगवान शिवशंकर का निवास स्थान माना जाता है। महिलाएं इस दिन यम देवता की पूजा करती हैं। पूजा के पश्चात सामर्थ्यनुसार दान अवश्य देना चाहिए। साथ ही शनि देव की पूजा की जाती है। शनि चालीसा का जाप करें।

नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।


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