प्रवासी मजदूरों का दर्द, कहा-अपने ही घर में कर दिए गए बेगाने

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । औरैया सड़क हादसे के बाद प्रधानमंत्री से लेकर सीएम योगी ने दुःख जताते हुए मजदूरों से एक बार फिर पैदल या किसी सवारी गाड़ी से न चलने की अपील की थी । साथ ही सीएम योगी ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रवासी मजदूर पैदल न जाएं, बार्डर से उन्हें सुरक्षित घर तक पहुंचाएं। लेकिन जहां एक तरफ जनपद में प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला लगातार जारी है वही अब उनके साथ दुर्व्यहार व लापरवाही का मामला भी सामने आने लगा है । ऐसा ही मामला जनपद सोनभद्र में सामने आया। जहां मुम्बई से लौटे प्रवासी मजदूरों को बिना मेडिकल जांच कराए घर जाने के लिए कह दिया गया। मगर मजदूर चाहते थे कि घर जाने से पहले उनका मेडिकल जांच कराया जाय ताकि उनका घर व गांव सुरक्षित रहे। मगर कुछ पुलिसकर्मी व चेकिंग में लगे लोग मुंबई से लौटने का नाम सुनते ही भगाने लगे। इतना ही नहीं कुछ मजदूर तो बड़ी मुश्किल से अपनी मेडिकल जांच करा पाए, जिसके बाद उन्हें पैदल ही घर लौटना पड़ा।

सड़क के किनारे खड़े यह प्रवासी मजदूर आज अपने ही जनपद में बेगाने से हो चले हैं। मुंबई में काम करने वाले यह सभी मजदूर सोनभद्र के निवासी हैं। लॉक डाउन के दौरान मुंबई में ही फंसे थे। शुरुआती दौर में उन्हें लगा कि शायद लॉक डाउन खुल जाएगा, मगर जैसे-जैसे लॉक डाउन एक के बाद 2 और 3 बढ़ने लगा इनका धैर्य जवाब देने लगा। इनके पैसे भी खर्च हो चले थे इसलिए वे घर जाने की योजना बनाएं और एक ट्रक पर बैठकर अपने घर लौट चलें। मजदूरों का कहना है कि लगभग एक लाख रुपये में ट्रक को तय किया गया था। जिसमें एक महिला समेत 22 लोग सवार थे। वह ट्रक उन्हें वाराणसी के टेंगड़ा मोड़ छोड़ दिया जिसके बाद वहां से दूसरे ट्रक से किसी तरह वो सोनभद्र पहुंचे। सोनभद्र पहुंचने के बाद वे चाहते थे कि घर जाने से पहले उनकी मेडिकल जांच हो जाए ताकि उनका गांव और उनका परिवार सुरक्षित रहे। मगर जैसे ही सोनभद्र पहुंचे पुलिस वालों ने वाहन को धर दबोचा और सीधे चौकी ले गए। यहां पूछताछ के बाद जैसे ही उन्हें मालूम चला ये सभी मुंबई से लौटे हैं तो वे घर भगाने पर आमादा हो गए। मजदूर गिड़गिड़ाते रहे कि उन्हें जांच करानी है मगर पुलिस वाले और सड़कों पर जांच करने के लिए मौजूद कुछ अधिकारी घर जाने की सलाह देने लगे। मगर मजदूर पैदल ही जांच कराने निकल पड़े। हालांकि उन्हें यह नहीं सूझ रहा था कि उन्हें जाना कहां है और क्या करना है। सड़कों पर वे कड़ी धूप में खड़े होकर किसी मददगार का इंतजार कर रहे थे। वहां से गुजर रहे जनपद न्यूज़ live की टीम की निगाह इन लोगों पर पड़ी। हाईवे के पटरी पर बैग झोला-डंडा लेकर खड़े इन लोगों को देखकर यह समझ में आ गया कि यह प्रवासी हैं, पास जाने पर उन्होंने अपना दर्द बयां किया।

प्रवासी मजदूरों नसरुद्दीन अंसारी व शमशेर अली ने कहा कि “जितनी दिक्कत उन्हें मुंबई से सोनभद्र लौटने पर नहीं हुई उतनी दिक्कत अब उन्हें अपने ही जनपद में हो रही है।”

वहीं दमन द्वीप से लौटे मजदूरों ने बताया कि उन्हें रामगढ़ से आगे जाना है। मगर उन्हें अपने ही जनपद में कोई सुविधा नहीं मिल रही है। चेकिंग कराने अस्पताल पहुंचे तो उन्हें यह कह कर भगा दिया गया कि समय समाप्त हो गया है। उनका कहना है कि वह थक चुके हैं, बेहाल हैं, उनकी आज ही जांच करा दिया जाए ताकि वे अपने परिवार, अपने गांव जा सके। काफी मिन्नत के बाद उनकी जांच हुई मगर जांच के बाद कोई संसाधन मुहैया नहीं कराया गया इस लिए वे चिलचिलाती धूप में पैदल ही जाने को मजबूर हैं।

प्रवासी मजदूर ईश्वर प्रसाद ने बताया कि “दमन द्वीप से ₹3000 देकर वे किसी तरह एक ट्रक सवार होकर अपने जनपद पहुंचे है मगर उन्हें भी अपने ही जनपद में लोगों ने बेगाना बना दिया और अब वे 25 किमी0 पैदल चलकर घर पहुंचेंगे।”

किसी शायर ने सच ही कहा ही कि
“अगर इस जहाँ में मजदूर का न नामों निशाँ होता।
फिर न होता हवामहल और न ही ताजमहल होता।।”

लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर उन्हें कब तक अपने मजबूरी की कीमत चुकानी पड़ेगी।



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