इन्हें यूं ही नहीं कहा गया कोरोना योद्धा, पढ़िए सोनभद्र पुलिस की यह कहानी

एस प्रसाद (संवाददाता)

म्योरपुर । कोरोना के इस जंग में यदि आज हम सुरक्षित हैं तो इसके पीछे उन कोरोना योद्धाओं का हाथ है जो विषम परिस्थितियों में भी अपनी जान जोखिम में डालकर हमें सुरक्षित किया । पीएम मोदी ने अपने मन की बात में कोरोना की इस लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे लोगों को यूं ही कोरोना योद्धा का नाम नहीं दिया । कैसे-कैसे ये योद्धा तमाम दुश्वारियां झेलकर हमें बचाने में जुटे हैं, इसकी एक बानगी सोनभद्र में देखने को मिला । आज हम कोरोना योद्धा में पुलिस के कार्यों को बताने जा रहे हैं जिसे देखकर और सुनककर आप ही हैरान रह जाएंगे। इन योद्धाओं के बारे में जानकर आप न सिर्फ इनपर गर्व करेंगे बल्कि सलाम भी करेंगे ।

तीन राज्यों की सीमाओं से लगा लीलासी गांव म्योरपुर थाना अंतर्गत आता है । नक्सल प्रभावित इस गांव से होकर लोग बिहार-झारखण्ड व छत्तीसगढ़ जाते हैं ।

फाइल फोटो

बार्डर का यह गांव 22 मार्च 2018 को उस वक्त चर्चा में आया जब यहां वन भूमि कब्जा रोकने गयी पुलिस फोर्स व वन विभाग के टीम की आदिवासियों से भिड़त हो गयी । इस घटना में कई पुलिस कर्मी घायल हो गए थे । इस बड़ी घटना के बाद प्रदेश के कई अधिकारियों का दौरा करके अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी ।जिसके बाद शासन स्तर से लीलासी में एक पुलिस चौकी खोलने की मंजूरी मिल गयी ।
चौकी खुली तो स्थानीय लोगों में खुशी का ठिकाना नहीं था । लेकिन वहीं वन माफियाओं का धंधा मंदा पड़ने लगा ।

चौकी खुलने से म्योरपुर थाने की पुलिस को बेशक भागदौड़ से निजात मिल गया लेकिन चौकी पुलिस की परेशानी कम नहीं हुई। सन 2018 से लेकर आज तक चौकी एक यात्री शेड में संचालित हो रहा है । चारों तरफ से खुले इस यात्री शेड में जहां सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा बना रहता है वही पुलिस कर्मियों को कामकाज करने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है । मगर इन पुलिस कर्मियों के हौसले की दाद देनी होगी कि तमाम मौसमों की मार झेलने के बाद भी उफ नहीं किया । तभी तो उन्हें योद्धा का दर्जा मिला ।
आज जहां कोरोना संक्रमण को लेकर लोग घरों में दुबके हैं और लॉक डाउन हैं, वहीं लीलासी चौकी के ये योद्धा आज भी इसी यात्री शेड के नीचे अपनी ड्यूटी को बखूबी अंजाम दे रहे हैं । इस वैश्विक महामारी में जहां लोगों को बचाना भी है, समझना भी है वही नक्सल क्षेत्र की वजह से सतर्क भी रहना इनके लिए बड़ी चुनौती है ।
यूं तो पब्लिक में पुलिस का चेहरा अक्सर बदरंग रहा है । ख़ाकी पर अक्सर लोगों का गुस्सा व नाराजगी देखने व सुनने को भी मिलता रहा है । मगर इस कोरोना ने इस दूरी को काफी कम कर दिया। उसी के नतीजा है कि लोगों ने इन योद्धाओं को कई जगह पुष्प वर्षा कर सम्मनित किया । अब क्षेत्र के लोग इन्हें अपना मनाने लगे हैं, शायद यही कारण है कि लोगों को इनका दर्द भी दिखने लगा हैं । स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी बढ़ रही है ऐसे में लू के थपेड़ों में ये पुलिसकर्मी आखिर शेड के नीचे कैसे रहेंगे । कुछ लोगों का मानना है कि गर्मी की मार फिर भी झेल लेंगे लेकिन चारों तरफ खुला होने के कारण बरसात कैसे कटेगी, कहाँ रहेंगे? क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने जल्द भवन निर्माण हेतु जिलाधिकारी समेत पुलिस अधीक्षक का ध्यान आकृष्ट कराया है । जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक निजी भवन की व्यवस्था नहीं होती, तब तक वैकल्पिक भवन की व्यवस्था की जाय ।


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