स्वार्थ छोड़िए, भगवान हमेशा आपके लिए सर्वोत्तम का करेंगे चयन,जानें

एक छोटा लड़का बहुत स्वार्थी था, हमेशा अपने लिए सर्वश्रेष्ठ चुनता था। धीरे-धीरे सभी दोस्तों ने उस लड़के का साथ छोड़ दिया, उसका कोई भी दोस्त नहीं रहा। इसके बावजूद उसे अपनी कोई गलती नहीं दिखती थी और वह दूसरों की आलोचना करता रहता था।

इस पर उसके पिता ने उस लड़के को तीन दिन में तीन संदेश दिए। उसके पिता ने लड़के के सामने हलवे के दो कटोरे रखे। एक कटोरे में हलवे के ऊपर दो बादाम रखे थे जबकि दूसरा वाला हलवा सादा था। इसके बाद उन्होंने अपने लड़के से हलवे का कोई एक कटोरा चुनने के लिए कहा।

लड़के ने तुरंत दो बादाम वाला कटोरा चुना और खुद के निर्णय पर काफी खुश हुआ और अपना हलवा खाना शुरू किया। कुछ देर बाद ही लड़के ने देखा कि जो हलवा उसके पिता ने लिया था, उस कटोरे के नीचे 8 बादाम थे। लड़के को जल्दबाजी में लिए गए अपने निर्णय पर बहुत पछतावा हुआ।

उसके पिता मुस्कराए और बताया कि आपकी आंखें जो देखती हैं, वह हरदम सच नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यदि आप स्वार्थ की आदत की अपनी आदत बना लेते हैं तो आप जीत कर भी हार जाएंगे। अगले दिन, उस लड़के के पिता ने फिर से हलवे के 2 कटोरे टेबल पर रखे। इस बार भी एक कटोरे के शीर्ष पर दो बादाम और दूसरे में कोई बादाम नहीं था। पिता ने फिर से एक कटोरे को चुनने के लिए कहा। इस बार लड़के को पिछले दिन का संदेश याद था तो उसने शीर्ष पर बिना किसी बादाम वाली कटोरी का हलवा चुना। इस बार लड़के को बहुत आश्चर्य हुआ कि कटोरे के नीचे कोई बादाम नहीं था।

इस बार उसके पिता ने फिर समझाया कि हमेशा अनुभवों पर भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि कभी-कभी जीवन आपको धोखा दे सकता है। साथ ही स्थितियों से भी कभी ज्यादा परेशान या दुखी न हों, बस अनुभव को एक सबक अनुभव के रूप में समझें।

तीसरे दिन, लड़के के पिता ने उसी प्रकार हलवे के दो कटोरे रखे और चुनने के कहा। लड़के ने लेकिन इस बार अपने पिता से कहा कि वह परिवार के मुखिया हैं, परिवार में उनका योगदान सबसे ज्यादा है, इसलिए वह जो चुनेंगे, वह वही लेगा। इस बार पिता अपने बेटे के निर्णय पर खुश थे और उन्होंने शीर्ष पर 2 बादाम के साथ वाला कटोरा बेटे को दिया। लड़के ने जब हलवा खाया तो दंग रह गया, क्योंकि इस बार शीर्ष पर बादाम वाले हलवे के कटोरे में नीचे भी चार बादाम निकले।

उसके पिता मुस्कुराए और बोले जब तुम भगवान पर अपना फैसला छोड़ देते हो तो वे हमेशा तुम्हारे लिए सर्वोत्तम का चयन करते हैं। जब तुम दूसरों की भलाई के लिए सोचते हो तो अच्छी चीजें स्वाभाविक तौर पर आपके साथ जुड़ जाएगी।


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