कहीं फांकाकशी का शिकार न होने लगे मजदूर

मनोहर गुप्ता (संवाददाता)
– लॉक डाउन में 50 दिन से बन्द है उनका काम
– घर वापसी से बढ़ा है अर्थ संकट

डीडीयू नगर। कोरोना वायरस के संक्रमण से उपजी समस्या का सबसे ज्यादा व व्यापक प्रभाव मजदूरों पर पड़ा है। विभिन्न राज्यों में काम करने वाले मजदूरों की हालत खस्ता हो गई है।लॉक डाउन के बाद घर वापसी के लिए पलायन कर कर रहे हैं। सरकार ने उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन भी चलाई। फैक्टरियों व कारखानों में काम करने व अन्य रोजगार कर पेट पालने वाले मजदूर अपने गांवों को लौट गए।उनके समक्ष रोजगार की समस्या है। अर्थ संकट के चलते उन्हें फांकाकशी का शिकार होना पड़ सकता है।
कोरोना महामारी से की देश की अर्थव्यवस्था बेपटरी हो गयी है। हालात ये हैं कि बेहिसाब लोग बेरोजगार हो गये हैं। फैक्टियों में काम बंद होने से प्रवासी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।उनके सामने अब भुखमरी के हालात हैं। वहीं इस संकट की घड़ी में सरकार भी योजनाएं बनाने में लगी हैं। कोरोना वायरस से लड़ने व इसके प्रभाव को कम करने के लिए देश मे लॉक डाउन चल रहे हैं।लॉक डाउन फेज थ्री में मजदूरों की वापसी हो रही है।यह वापसी सरकारों के लिए चुनौती भी बन रही है।मजदूरों का सब्र टूट सकता है।लॉकडाउन और काम बंद होने के वजह से पहले से ही बड़ी आबादी के समक्ष भोजन की समस्या उत्पन्न हो गयी है। सरकार व प्रशासन की ओर से कम्यूनिटी किचेन चलाया जा रहा है।वहीं सामाजिक संगठन भी लॉक डाउन दो तक भोजन व राशन दे रहे थे । अब इस पर भी धीरे धीरे विराम लग रहा है। मजदूर पिछले 50 दिन से काम के अभाव में बैठे हैं।घर वापसी के बाद परिवार का बोझ और बढ़ गया है। गांव में भी किसानी का समय गुजर गया है।भवन निर्माण का कार्य चल रहा है।लेकिन महंगाई की वजह से इस काम मे भी तेजी नहीं दिख रही है। कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है। सरकार फूंक फूंक कर कदम उठा रही है।मजदूरों के समक्ष रोजी रोटी के संकट बन गया है।कहीं यह संकट फांकाकशी का केंद्र न बन जाए।


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