राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त की मदर्स डे पर भावुक अपील, पढ़ें पूरी खबर

दीनदयाल शास्त्री (ब्यूरो)

पीलीभीत। उच्च प्राथमिक विद्यालय इंग्लिश मीडियम, बरहा विकास क्षेत्र ललौरीखेड़ा की राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत प्रधानाध्यापिका ममता गंगवार ने मातृ दिवस पर सभी से अपील करते हुए कहा है कि मई माह के दूसरे सप्ताह के रविवार को मातृ दिवस के रूप में मनाया जाता है। हमारे देश में यह दिवस कस्तूरबा गांधी के सम्मान में मनाये जाने की परंपरा है और प्रत्येक वर्ष सभी देश वासियों द्वारा मनाया जाता है । उन्होंने बताया कि हमारे वेदों में भी माता को सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त है और यथार्थ में देंखे तो यह सर्वसत्य भी है। क्योंकि हमारी मां ही हमारे जीवन का आधार होती है, जो हमारे जीवन की बुनियाद भी होती है । हमारा संपूर्ण अस्तित्व होती है और हमारा प्रथम गुरु भी माता ही होती है । क्योंकि माता ही है जो हर पल-हर क्षण हमारे लिए ही अपना जीवन जीती है हमारे लिए सोचती है. उन्होंने व्याख्या करते हुए बताया कि माता वह है जिसका प्रेम निश्चल है वह अपने बच्चों को खुद से भी ज्यादा प्रेम करती हैं ।
मॉ का आंचल अपनी संतान के लिए कभी छोटा नहीं पड़ता और मां का प्रेम अपनी संतान के लिए इतना गहरा और अटूट होता है कि मां अपनी सन्तान की खुशी के लिए सारी दुनियां से लड़ लेती है। माता का हमारे जीवन में बहुत बड़ा महत्व है । मेरी मां के बिना मेरी दुनिया अधूरी है । स्वंय अधूरी हूं क्योंकि मेरी माता ही मेरा भूत, वर्तमान और भविष्यकाल भी होगी। क्योंकि आज मैं जहां भी और जो भी हूँ, उसके पीछे मेरी माता के संस्कार और आशीर्वाद ही हैं।
मेरी माता जीवन दायिनी, चलना सिखाने वाली, प्रगति की प्रेरणा, उन्नति की कामिनी, जीवन का आधार, जीवन का सर्वस्व, जीवन मूल्यों का संग्रह, सम्पूर्ण संसार है मेरी माता।

मातृ दिवस पर राजा रंक फ़िल्म का वह गीत याद आ रहा है- वो होते हैं किस्मत वाले जिनके मां होती है। वन है कांटो का तू फुलबाड़ी हैं। ओ मां-ओ मां।

ममता जी का कहना है कि इस मातृ दिवस पर एक संकल्प लें कि मां की ममता को याद कर, उनके दिए साथ को कभी ना भूलाकर हम उन्हें खास दिन पर खास बना सकते हैं।
और उन्हें यह अहसास दिलाकर कि ‘मां, जिस तरह आपने मेरे जीवन की हर राह पर मेरा साथ दिया मैं भी उसी तरह हर कदम पर आपके साथ हूं।
जब मेरे कदम लड़खड़ाए थे, तब मां सिर्फ आपने ही मुझे सहारा दिया, जब मेरी आंखों से आंसू गिरे, आपके आंचल ने ही उन आंसुओं को पोंछा। लेकिन अब सिर्फ मेरी बारी है तुम्हें सहारा देने की, तो मैं क्यों पीछे हटूं। जब आपके कदम लड़खड़ाएंगे, मैं भी हर कदम पर आपके साथ हूं।’

राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त ममता मानती है कि हमारे समाज में हर बात को महत्व देने के लिए 365 दिनों में से सिर्फ ‘एक दिन’ तय कर दिया गया हैं पर मां को महत्व देने के लिए सिर्फ एक दिन काफी नहीं हैं। जिस तरह मां की ममता का प्रेम ‘असीमित और नि:स्वार्थ’ है, उसी तरह मां के लिए हर दिन एक महत्व लिए होना चाहिए और सिर्फ दिन ही क्यों बल्कि हर क्षण वह हमारे लिए महत्वपूर्ण होना चाहिए। अगर हम भी बिना किसी स्वार्थ के उन्हें आदर देकर, मां की ममता को भूले बिना और उनका हर सुख-दु:ख में साथ दें, तो अपना जीवन सार्थक बना सकते।


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