‘कोरोना’ का वार, मजदूर बेकार लॉक डाउन ने मजदूरों के लिये खड़ी की मुसीबत

मनोहर कुमार (संवाददाता)

– घर वापसी के बाद होगा अर्थ का संकट

डीडीयू नगर । कोरोना वायरस के संक्रमण काल का सबसे ज्यादा असर मजदूरों पर दिख रहा है।विभिन्न राज्यों में रोजी रोजगार के लिए गए मजदूर अब अपने घर लौटने लगे हैं। इसका असर अब उनके दैनिक जीवन पर पड़ेगा ।उसके बाद जिस संस्थानों व फैक्टरियों में काम कर रहे थे वहां के श्रम पर पड़ेगा। कामगारों के न रहने से उत्पादन प्रभावित होगा। बेरोजगार होकर घर लौटे मजदूरों की मुसीबत और बढ़ेगी।आने वाले समय में उनके लिए संकट का दौर शुरू हो सकता है।
विश्व के अधिकांश देश कोरोना के कातिल कहर से कराह रहा है। भारत मे भी कोरोना का कहर जारी है। देश मे इस समय लॉक डाउन का दौर जारी है।दो फेज का लॉक डाउन समाप्त हो गया। चार मई से लॉक डाउन का तीसरा चरण चल रहा है।अब तक कोरोना से लगभग 52 हजार लोग देश मे संक्रमित हैं।लॉक डाउन के बाद से सबसे ज्यादा बेचैनी मजदूरों को हुई है।24 मार्च को लॉक डाउन का दौर शुरू होने के साथ मजदूर घर वापसी के लिए परेशान हो गए।विभिन्न प्रदेशों में काम करने वाले मजदूर काम बंद होने के बाद बेकार हो गए। रोजी रोटी का संकट खड़ा देख अपने राज्य वापसी के लिए बेचैन हो गए। उस समय पैदल ही अपने परिवार व बच्चों के साथ निकल पड़े थे। जिसके बाद सरकार उन्हें शेल्टर देने के साथ भोजन पानी की व्यवस्था में जुट गई।लॉक डाउन तीन के शुरू होने के साथ राज्यों ने अपने राज्य के कामगारों को दूसरे राज्य से वापस बुलाने की पहल शुरू कर दी।इसमें उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा।प्रदेश सरकार से राजस्थान के कोटा से यूपी के छात्रों को वापस बुलाया। इसके बाद ट्रेन से मजदूरों को भेजने की मांग उठी।केंद्र सरकार ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन के जरिये श्रमिकों को उनके घर भेजना शुरू कर दिया।स्थानीय जंकशन पर भी श्रमिक स्पेशल ट्रेन से मजदूर लौटे जिन्हें यहां आवश्यक जांच पड़ताल के बाद बसों से उनके गन्तव्य को भेजा गया।इसके बाद पैदल मजदूर जा रहे है। मजदूरों के समक्ष रोजी रोटी का संकट खड़ा हो रहा है।जिस रोजी रोजगार के लिए गांवों से पलायन कर सपरिवार शहरों की ओर गए थे।’कोरोना’ के संक्रमण काल ने फिर उनके गांव वापस लौटने के लिए विवश हो गया। गांव में उनके लिए काम धाम व रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।अभी लॉक डाउन के लिए संशय बरकरार है।वहीं कोरोना का संकमण बढ़ रहा है।मजदूर मजबूर होकर निराश घरों में बैठे है।अब उम्मीद उन्हें है कि कोरोना काल समाप्त हो तो फिर काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन करें।


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