मानवता शर्मसार : खून की व्यवस्था नहीं कर सकी तो निकाल दिया अस्पताल के बाहर, पढ़े पूरी खबर

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

■ मीडिया के पहुंचने पर हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग

सोनभद्र । सोनभद्र में एक बार फिर डॉक्टरों व अस्पताल कर्मचारियों की अमानवीय घटना सामने आई है। वाराणसी के बीएचयू में सोनभद्र के एक मरीज को बाहर निकाल दिए जाने की घटना अभी शांत भी नहीं हुआ था कि सोनभद्र के जिला अस्पताल में बने पीपीपी मॉडल पर चल रहे
100 शैय्या युक्त मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग अस्पताल में दो महीने की गर्भवती महिला को खून की व्यवस्था न कर पाने के कारण बाहर निकाल दिया। जिसके बाद मरीज के तीमारदारों ने उसे बाहर जमीन पर लिटा कर मदद की गुहार लगाने लगी।

घटना की जानकारी के बाद जनपद न्यूज़ live की टीम अस्पताल पहुंची तो अस्पताल का कोई भी स्टाफ कुछ भी बताने को तैयार नहीं था, बाद में सीएमएस के बुलाये जाने के बाद मरीज को किसी तरह जमीन से उठाकर व्हीलचेयर के माध्यम से अस्पताल के अंदर किया गया।

यह तस्वीर उस जिले की है जो सूबे को सबसे ज्यादा राजस्व देता है। ग्रामीण इलाकों के लोग जिला अस्पताल इस उम्मीद से आते हैं कि उनका बेहतर इलाज होगा लेकिन उन्हें क्या पता कि जिस उम्मीद से वे जिला अस्पताल आते हैं उनके साथ क्या होने वाला है।

ऐसा ही मामला बुधवार को जिला अस्पताल में बने पीपीपी मॉडल से संचालित 100 शैय्या युक्त मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग में देखने को मिला, जहां करमा से चलकर बेहतर इलाज की उम्मीद लिए जिला अस्पताल पहुंची एक गर्भवती महिला को खून की कमी होने के कारण उसे खून की व्यवस्था करने के लिए कहा गया। जब महिला के तीमारदारों ने खून की व्यवस्था करने में असमर्थता जताई तो अस्पताल प्रशासन ने महिला को गेट के बाहर निकाल दिया।

पीड़ित महिला के तीमारदारों ने बताया कि इनके पति लॉकडाउन में बाहर फंसे हुए हैं और वे सभी महिला है, जिसकी वजह से वह खून की व्यवस्था आखिर कहां से करें। इसके बाद पीपीपी मॉडल के अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे बीएचयू रेफर कर दिया और रेफर पर्ची देने के बाद उसे बाहर निकाल दिया। बेबस तीमारदार पीड़ित महिला को लेकर अस्पताल गेट पर लिटा दिया और मदद की गुहार लगाते रहे, मगर वहां उसकी मदद के लिए कोई भी आगे नहीं आया।

मामले की जानकारी जब जनपद न्यूज़ live की टीम को हुई तो तत्काल जनपद न्यूज़ live की टीम मौके पर पहुँची और पूरे मामले को समझने के बाद सीएमएस को घटना से अवगत कराया। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुँचे सीएमएस भी यह नजारा देखकर हैरान थे। महिला जमीन पर लेटी हुई थी और उसे लगा बोतल का पानी एक महिला हाथ में लेकर खड़ी थी। पूछने पर बताया कि उसे बीएचयू भेजा जा रहा है। तीमारदारों ने बताया कि वह बहुत गरीब है और उसका कोई नहीं है ऐसे में उसके पास न तो कोई व्यवस्था है और ना ही पैसे। बीएचयू जाकर आखिर वे क्या करेगी?

जिसके बाद सीएमएस ने पहले अस्पताल के डॉक्टरों व कर्मचारियों को जमकर फटकार लगाई और पूछा कि आखिर यह किस मानवता में आता है ? आखिर महिला जमीन पर क्यों लेटी ? अस्पताल प्रशासन के पास इसका कोई जवाब नहीं था। मीडिया का कैमरा देखकर अस्पताल प्रशासन सबसे पहले महिला को व्हीलचेयर के माध्यम से अस्पताल के अंदर कर लिया।

तीमारदार सविता ने बताया कि उनके पास महज ₹500 ही हैं ऐसे में बनारस बीएचयू कैसे जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि खून के लिए अस्पताल प्रशासन पैसे मांग रहा है। यदि वे घर पहुंच जाएंगे तो कुछ अनाज बेचकर पैसे की व्यवस्था कर सकती हैं।

वहीं पीड़ित की माँ बुधनी ने रोते हुए बताया कि दो महीने का गर्भ था जो खराब हो गया है। डॉक्टर खून की व्यवस्था के लिए कहे थे। जब नहीं कर सके तो उन्हें बनारस के लिए रेफर कर दिया और बाहर निकाल दिया। महिला ने बताया कि वह बनारस नहीं जाना चाहती, उसके पास पैसे नहीं है।

मानवता को शर्मसार करने वाली इस घटना को लेकर जब सीएमएस डॉ0 पी0बी0गौतम से पूछा गया तो उनका कहना है कि यह घटना बेहद दुःखद है। उन्होंने बताया कि मरीज को अस्पताल के अंदर करवा दिया है और अस्पताल अधीक्षक को खून की डिमांड भेजने के लिए निर्देशित कर दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व्यवस्थाओं में सुधार का भले ही कितना दावा करें मगर हकीकत किसी से छुपी नहीं । ऐसे में जब करोड़ों की लागत से बने पीपीपी मॉडल के अस्पताल का ये हाल है तो जनपद के दूरदराज के इलाकों में चिकित्सा सुविधाओं के क्या हाल होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं इन हालातों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राज्य सरकार के दावों की भी हवा निकलती नजर आ रही है


अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
error: Content is protected !!