ग्रीन, ऑरेंज और रेड जोन में कैट द्वारा मामलों की सुनवाई के लिए नए दिशानिर्देश

PIB Delhi
गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिनांक 24.03.2020 को घोषित लॉकडाउन के आदेश तथा दिनांक 14.04.2020 को जारी लॉकडाउन के 03.05.2020 तक विस्तार के आदेश को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की प्रधान पीठ और देश भर में इसके अन्य पीठों के कामकाज को निलंबित कर दिया गया था। गृह मंत्रालय ने 01.05.2020 को आदेश जारी किया जिसके तहत कोविड – 19 के मामलों की गंभीरता का आधार पर रेड (हॉटस्पॉट्स), ग्रीन और ऑरेंज जोन की पहचान के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं। आदेश में इन क्षेत्रों में निषिद्ध और शुरू की जानेवाली गतिविधियों के बारे में भी बताया गया है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के कार्य करने के सम्बन्ध में निम्न निर्देश जारी किये जाते हैं।

जहां भी पीठ / कोर्ट ग्रीन जोन में स्थित हैं, वे गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए कार्य करेंगे, जैसे एक – दूसरे से आवश्यक दूरी बनाये रखना, स्वच्छता की व्यवस्था करना और सीधे संपर्क से बचना। जहाँ तक संभव हो, संबंधित क्षेत्र के उच्च न्यायालयों के कामकाज के तरीके को अपनाया जाएगा। संबंधित पीठ के विभाग प्रमुख (एचओडी) बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के परामर्श से इस संबंध में निर्णय लेंगे। पीठ के रजिस्ट्रार से कर्मचारियों की सुविधा और उनके कामकाज के तरीके के बारे में फीडबैक लिया जाएगा। इस संबंध में लिए गए निर्णयों को प्रधान पीठ की रजिस्ट्री को भेजा जाएगा।

रेड (लॉकडाउन क्षेत्रों) और ऑरेंज ज़ोन के पीठों में, संबंधित पीठ के रजिस्ट्रार से संपर्क करके, तत्काल महत्त्व के मामलों को इलेक्ट्रॉनिक मेल सेवा (ई-मेल) के माध्यम से दायर किया जा सकता है। रजिस्ट्रार, इच्छुक अधिवक्ता या वादी को ई – मेल आईडी उपलब्ध कराएँगे। यदि रजिस्ट्री संतुष्ट है कि ओए आदेश के तहत है और इसे तत्काल निपटाए जाने की आवश्यकता है, तो खंडपीठ के विभाग प्रमुख (एचओडी) को इस बारे में सूचित किया जाएगा। इसके बाद विभाग प्रमुख (एचओडी) तय करेंगे कि मामला तत्काल सुनवाई के लायक है अथवा नहीं। यदि इस मामले की सुनवाई का प्रस्ताव दिया जाता है तो यह सुनवाई सिस्को वेबेक्स ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा के माध्यम से की जायेगी।

प्रधान पीठ की रजिस्ट्री के परामर्श से पीठों के विभाग प्रमुख (एचओडी) द्वारा तत्संबंधी विवरणों को अंतिम रूप दिया जायेगा। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वीडियो कॉन्फ्रेंस में भाग लेने वाले उचित परिधान में हों या कम से कम अच्छे कपड़े पहन रखे हों।

यदि बार एसोसिएशन के अधिवक्ता इस तरह की व्यवस्था के माध्यम से लंबित मामलों की सुनवाई के लिए सहमत हों, तो रजिस्ट्री द्वारा मामलों की पहचान की जाएगी। मामलों की सुनवाई उपरोक्त प्रणाली के माध्यम से उस समयावधि में की जाएगी जिसका निर्धारण विभाग प्रमुख (एचओडी) दैनिक आधार पर करेंगे।

यह व्यवस्था 17.05.2020 तक या अगले आदेश तक लागू रहेगी।


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