नारी सशक्तिकरण : मेडिकल छात्राओं ने कस्बे व खजुरी में चलाया कोरोना जागरूकता अभियान

रमेश यादव (संवाददाता)

दुद्धी। मेडिकल छात्राओं की 5 सदस्यीय कॅरोना जागरूकता टीम शुक्रवार को स्थानीय नगर पंचायत के वार्ड नंबर 4 सहित खजूरी गाँव का दौरा किया। टीम का नेतृत्व कर रहीं अर्मेनिया गवर्नमेंट स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी की एमबीबीएस फाइनल ईयर की छात्रा ऐमन अंसारी ने उपस्थिजनों को संबोधित करते हुए कहा कि दुनियां भर में कोरोना वायरस से अब तक दो लाख, 32 हज़ार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही संक्रमण के मामले भी बढ़कर 32 लाख 56 हज़ार से ज़्यादा हो गए हैं। कोरोना वायरस इंसान के फेफड़ों को संक्रमित करता है। इसके दो मूल लक्षण होते हैं बुख़ार और सूखी खांसी। कई बार इसके कारण व्यक्ति को सांस लेने में भी दिक्कत पेश आती है। कोरोना के कारण होने वाली खांसी आम खांसी नहीं होती। इस कारण लगातार खांसी हो सकती है यानी आपको एक घंटे या फिर उससे अधिक वक्त तक लगातार खांसी हो सकती है और 24 घंटों के भीतर कम से कम तीन बार इस तरह के दौरे पड़ सकते हैं। लेकिन अगर आपको खांसी में बलग़म आता है तो ये चिंता की बात हो सकती है।
युन्नान यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रेडिशनल चाइनीज़ मेडिसिन से एमबीबीएस थर्ड ईयर की छात्रा शबनम परवीन ने बताया कि इस वायरस के कारण शरीर का तापमान 37.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है जिस कारण व्यक्ति का शरीर गर्म हो सकता है और उसे ठंडी महसूस हो सकती है। व्यक्ति को शरीर में कंपकंपी भी महसूस हो सकती है। इसके कारण गले में खराश, सिरदर्द और डाएरिया भी हो सकता है।
अर्मेनिया से ही एमबीबीएस सेकेंड ईयर की छात्रा एरम अंसारी ने बताया कि हाल में आए एक ताज़ा शोध के अनुसार कुछ खाने पर स्वाद महसूस न होना और किसी चीज़ की गंध का महसूस न होना भी कोरोना वायरस का लक्षण हो सकता है।
माना जा रहा है कोरोना वायरस के लक्षण दिखना शुरु होने में औसतन पांच दिन का वक्त लग सकता है लेकिन कुछ लोगों में ये वक्त कम भी हो सकता है।
अंत में अलीगढ़ से डीफार्मा कर चुकीं हबीबा खातून ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार वायरस के शरीर में पहुंचने और लक्षण दिखने के बीच 14 दिनों तक का समय हो सकता है।
जिन लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण है उनमें से अधिकतर लोग आराम करने और पैरासिटामॉल जैसी दर्द कम करने की दवा लेने से ठीक हो सकते हैं। अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत तब होती है जब व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत आनी शुरू हो जाए। मरीज़ के फेफड़ों की जांच कर डॉक्टर इस बात का पता लगाते हैं कि संक्रमण कितना बढ़ा है और क्या मरीज़ को ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की ज़रूरत है।
यहां कोरोना वायरस के मरीज़ों के ऑक्सीजन की ज़रूरत को मुंह पर ऑक्सीजन मास्क लगा कर या फिर नाक में ट्यूब के ज़रिए पूरा किया जाता है।
जो लोग गंभीर रूप से बीमार हैं उन्हं वेंटिलेटर पर रखा जाता है।अगर आप किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आते हैं तो आपको कुछ दिनों के लिए ख़ुद को दूसरों से दूर रहने की सलाह दी जा सकती है।

अंत में सीनियर छात्रा ऐमन ने बताया कि कोरोना वायरस यानी ‘कोविड 19’ से बचने के लिए आप नियमित रूप से अपने हाथ साबुन और पानी से अच्छे से धोएं। जब कोरोना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैलते हैं. इन कणों में कोरोना वायरस के विषाणु होते हैं। संक्रमित व्यक्ति के नज़दीक जाने पर ये विषाणुयुक्त कण सांस के रास्ते आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। अगर आप किसी ऐसी जगह को छूते हैं, जहां ये कण गिरे हैं और फिर उसके बाद उसी हाथ से अपनी आंख, नाक या मुंह को छूते हैं तो ये कण आपके शरीर में पहुंचते हैं। ऐसे में खांसते और छींकते वक्त टिश्यू का इस्तेमाल करना, बिना हाथ धोए अपने चेहरे को न छूना और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचना इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के अंत मे टीम द्वारा मास्क और ग्लब्स वितरित किया गया। लोगों ने छात्राओं के इस हौसले को बड़ा ही पुनीत कार्य मान उन्हें आशिर्वाद और दुवाएं दी। इस मौके पर विनय तिवारी, विभा उपाध्याय, सेराज खान, आबिद हुसैन, साकिर, ओम जौहरी, डॉ जमील, शमशाद खान, गुल्लू साह, नीलम सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे।


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