अब टीबी मरीजों का सैंपल लैब तक पहुंचाएंगे डाकिया

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

◆ स्पीड पोस्ट, रजिस्ट्री और पार्सल के अतरिक्त अब टीबी मरीजों के सैम्पल लैब तक पहुँचाएँगे डाकिया

◆ 01 मई से सैम्पल एकत्रित करने की प्रक्रिया होनी थी प्रारम्भ

◆ जिला क्षय रोग अधिकारी बोले, कुछ अड़चनों के कारण सोनभद्र में एक सप्ताह बाद शुरू हो सकेगी यह योजना

◆ मरीजों का सैम्पल स्वास्थ्यकर्मी करेंगे एकत्रित और डाकिया सैम्पल जाँच के लिए लैब तक पहुँचाएँगे

सोनभद्र । कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन है। ऐसे में टीबी मरीजों को जांच को लेकर खासी दिक्कत हो रही है। ऐसे में टीबी की जांच के लिए लोगों को अपना सैंपल स्वयं सरकारी अस्पताल लेकर आना पड़ता था। लेकिन अब डाकिये डाक ही नहीं बल्कि क्षय रोग (टीबी) मरीजों के सैंपल भी लैब तक पहुंचाएंगे। नई व्यवस्था पूरे प्रदेश में आज से लागू हो रही है लेकिन लेकिन जनपद सोनभद्र में कुछ अड़चनों के कारण निर्धारित अवधि के बाद योजना जमीन पर उतर सकेगी।

टीबी के मरीजों को ढूंढ़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर मरीजों की जांच कर रही है। किसी मरीज में टीबी की शिकायत होती है तो संबंधित क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर बलगम की जांच करा सकता है। वहीं अब टीबी मरीजों को जांच कराने के लिए दौड़ नहीं लगानी होगी। मरीजों का सैंपल स्वास्थ्यकर्मी उनके घर से एकत्रित करेंगे और डाकिया न सिर्फ सैम्पल को लैब तक बल्कि मरीज की रिपोर्ट भी उनके घर तक पहुंचाने का काम करेंगे। यह पूरी प्रक्रिया निःशुल्क होगी।

बताते चलें कि केंद्र सरकार 2025 तक देश से क्षय रोग (टीबी) के खात्मे के संकल्प को तय समय सीमा से पहले पूरा करने को लेकर कई नई योजनाएँ और कार्यक्रम शुरू कर रही रही है। इसी कार्यक्रम के तहत टीबी के मरीजों का सैंपल 24 घंटे के भीतर सीएससी और पीएससी से लैब तक पहुंचाने के लिए डाक विभाग और स्वास्थ्य विभाग में राज्य स्तर पर एक समझौता हुआ है। पहले यह सैंपल कोरियर के जरिए भेजे जाते थे।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ0 बी0के0अग्रवाल ने बताया कि “सीएससी और पीएससी से सैंपल लैब तक कोरियर से भेजा जाता था। इसमें देरी हो जाती थी। निर्धारित समय पर टीबी मरीजों के सैंपल की जांच कर उनका उपचार शुरू किया जाए। इसके लिए राज्य स्तर पर स्वास्थ्य विभाग और डाक विभाग करार हुआ है। जिसके तहत मरीज स्वास्थ्यकर्मी को अपने बलगम के नमूना देगा और स्वास्थ्यकर्मी उस सैम्पल को पैक कर डाकिया को दे देंगे जिसे वह लैब तक पहुँचाने का काम करेगा। यह प्रक्रिया बिल्कुल निःशुल्क होगी, इसमें मरीज को कोई पैसा नहीं देना होगा। हालांकि स्थानीय स्तर पर भी डाक विभाग से एमओयू अभी साइन नहीं हो पाया है लेकिन एक सप्ताह के भीतर ही डॉक विभाग से एमओयू साइन करा कार्यक्रम की शुरुआत कर दी जाएगी।”


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