अनुशासन व त्याग का दूसरा नाम है रमजान- सद्दाम कुरैशी

घनश्याम पाण्डेय/विनीत शर्मा (संवाददाता)

चोपन। भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है दुनिया की समस्त संस्कृतियों की जननी भारतीय संस्कृति है ।भारतवर्ष संपूर्ण समाज में एक ऐसा राष्ट्र है जहां विश्व की सारी संस्कृतियों को देखने और जानने का अवसर प्राप्त होता है संस्कृतियों को संज्ञान में लेते हुए हम आपका परिचय इस्लाम धर्म के नौवें महीने रमजानुल मुबारक से कराते हैं रमजान मुस्लिमों का सबसे पाक महीना है यह महीना कई कारणो से विशेष है। एक व्यक्ति के मुसलमान होने के लिए जिन पांच मूलभूत शिक्षण को आवश्यक बताया गया है उनमें से एक रोजा भी है जो इसी महीने में रखा जाता है संसार के ज्यादातर धर्मों में किसी न किसी तरह उपवास का अपना एक अलग महत्व होता है उसी प्रकार रोजा का अपना एक विशेष स्थान है कि व्यक्ति को अनुशासन व जिंदगी की मूल उद्देश्यों के प्रति निरंतर अग्रसर अग्रेषित करता है खुद को खुदा की राह में समर्पित कर देने का प्रतीक पाक महीना माह-ए- रमजान न सिर्फ रहमतों, बरकतों और बख्शिशो की बारिश का महिना है बल्कि समूची मानव जाति को प्रेम भाईचारे और इंसानियत का संदेश भी देता है मौजूदा हालात में रमजान का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है और भूखे प्यासे रहकर खुदा की इबादत करने वालों की गुनाह माफ हो जाते हैं इस माह में दोजख़ यानी नर्क के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और जन्नत की राह खुल जाती है। रोजा अच्छी जिंदगी जीने का प्रशिक्षण है जिसमें इबादत कर खुदा की राह पर चलने वाले इंसान का जमीर रोजेदार को एक नेक इंसान के व्यक्तित्व के लिए जरूरी हर बात की तरबियत देता है। पूरी दुनिया की कहानी भूख प्यास और रोजा इन तीनों चीजों पर नियंत्रण रखने की साधना है ।रमजान का महीना तमान इंसानों के दुख दर्द और भूख प्यास को समझने का महीना है ताकि रोजेदारों में भले बुरे को समझने की सलाहियत पैदा हो। इस महीने में सक्षम लोग अनिवार्य रूप से अपनी कुल संपत्ति का एक निश्चित हिस्सा निकालकर उसे जकात के तौर पर गरीबों में बांटते हैं । रमजान की शुरुआत सन् दो हिजरी से हुई थी और तभी से अल्लाह के बंदों पर जकात़ भी फर्ज की गई थी। रमजान के महीने में अल्लाह के लिए हर रोजेदार बहुत खास होता है और खुदा उसे अपने हाथों से बरकत और रहम नवाजता है इस माह में बंदों को 1 रकात फर्ज नमाज अदा करने पर 70 रकात नमाज का सवाब मिलता है साथ ही इस महिने के 27वे रोजे पर शबे कद्र की रात में इबादत करने पर 1000 महीना से ज्यादा वक्त तक इबादत करने का सवाब हासिल होता है मुसलमानों पर रोजा इसलिए फर्ज किया गया है ताकि इस खास बरकत वाले रूहानी महीने में उनसे कोई गुनाह नहीं होने पाए यह खुदाई असर का नतीजा है कि रमजान में लगभग हर मुसलमान इस्लामी नजरिए से खुद को बदलता है और इस तरह से अल्लाह की रहमत पाने की कोशिश करता है अतःइन बातों से स्पष्ट होता है कि रमजान सत्य के मार्ग पर चलने ,गरीबों की मदद करने और अपने अंदर की बुराइयों को समाप्त करने का एक विशेष पाक महीना है।


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