जहाँ चाह वहाँ राह-आनलाइन शिक्षा का रोल मॉडल बनी दो शिक्षिका

फ़ैयाज़ खान मिस्बाही (ब्यूरो)

ग़ाज़ीपुर । सच कहा गया है कि जहाँ चाह वहाँ राह,बस किसी काम को करने का जज़्बा होना चाहिये।ग़ाज़ीपुर की दो महिला टीचरों ने इसको सच कर के दिखा दिया।लाकडाउन के चलते जहां सभी के कार्य प्रभावित हुए हैं, वहीं कुछ लोग इस मुश्किल समय में भी रास्ता निकाल ले रहे हैं। कुछ ऐसा ही कर रही हैं प्राथमिक विद्यालय सिधौना सैदपुर की शिक्षक प्रियंका यादव व प्राथमिक विद्यालय सुरतापुर मुहम्मदाबाद की शिक्षक बिदु राय। वह परिषदीय विद्यालयों के आनलाइन शिक्षा का रोल माडल बनी हुई हैं। जब स्कूल खुलने के दूर-दूर तक कोई आसार नहीं आ रहे हैं तो ऐसे में वह टीचिग का वीडियो बनाकर अपने बच्चों के अभिभावकों के स्मार्टफोन पर व्हाट्सएप के माध्यम से भेज रही हैं। इससे बच्चे घर बैठे पढ़ाई कर पा रहे हैं। इस तरीके से शिक्षक व विद्यार्थी दोनों के समय का सही इस्तेमाल हो रहा है।

प्रियंका यादव ने अपनाया ये तरीका
लाकडाउन के चलते बच्चों की शिक्षा पर ग्रहण लग गया है। नया शैक्षिक सत्र अभी तक शुरू होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में विभाग के निर्देश पर कुछ जागरूक शिक्षकों ने अपनी रणनीति बदल ली है। वह अब बच्चों को घर बैठे आनलाइन पढ़ाने व होमवर्क देने का काम शुरू कर दिए हैं। प्रियंका यादव ने बताया कि लाकडाउन के सबसे अधिक नुकसान बच्चों का हो रहा है। ऐसे में हमने घर से ही उनको पढ़ाने का काम शुरू किया है। प्रतिदिन मैं अपने घर पर टीचिग का वीडियो बनाती हूं और अपने स्कूल के बच्चों के अभिभावकों को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजती हूं। इसमें बच्चे व उनके अभिभावक भी काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। ऐसे में लाकडाउन के दौरान बच्चों के साथ हम शिक्षकों के समय का सदुपयोग भी हो रहा है और पढ़ाई भी। शिक्षामित्र विनय कुमार व ग्रामप्रधान की मदद से बच्चों के अभिभावकों का मोबाइल नंबर मिला। अब तो हमारी प्रधानाध्यापक ने बच्चों का व्हाट्सएप भी बना दिया है जिससे आनलाइन शिक्षण कार्य और आसान हो गया है।

करने के सौ तरीके,,नही करने के हज़ार बहाने
अगर इंसान कुछ करने का ठान ले तो हर मुश्किल आसान हो जाती है,बस उसकी नीयत अच्छी होनी चाहिए। मुहम्मदाबाद शिक्षा क्षेत्र स्थित प्राथमिक विद्यालय सुरतापुर की शिक्षक बिदु राय ने बताया कि विगत दो सप्ताह से हमारे विद्यालय में ऑनलाइन शिक्षण किया जा रहा है। रसोईयों और शिक्षामित्र के सहयोग से अभिभावकों से बात करवाकर उनका नंबर उपलब्ध कराया गया। जिनमें 12 अभिभावक एंड्रॉइड फोन वाले अभिभावक थे। उनके सहयोग से कला, क्राफ्ट, गणित, हमारा परिवेश और हिदी विषय पर लगातार शिक्षण किया जा रहा है। बच्चों का उत्साह और उनकी प्रतिक्रिया मेरा मनोबल और बढ़ा देता है। अब तक 18 बच्चे शिक्षण की नई विधा ऑनलाइन शिक्षण से लाभान्वित हो रहे हैं। प्रतिदिन फोन कॉल्स से याद किये गए पाठ को सुनना अब दिनचर्या सी बन गयी है। व्हाट्सएप पर प्रतिदिन शिक्षण सामग्री भेजा जाता है और बच्चे काम करके भेजते हैं। कुछ भी हो सच कहूं तो कुछ भी न करने से बेहतर है कुछ करना’। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ रही है। हमारे विद्यालय के बच्चों ने कोरोना को हराकर शिक्षा पर विजय हासिल किया है।
ऐसे टीचर हमारे समाज के लिए और शिक्षा के राह में एक संजीवनी की तरह काम कर रहे हैं।


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