वैश्विक महामारी से बचाव के लिए जागरूक कर रहे विद्या मंदिर के बच्चे

मनोज वर्मा (संवाददाता)

रेनुकूट । भवंस केसरी देवी कनोरिया विद्या मंदिर के छात्रों एवं अध्यापकों ने मिलकर अपने हाथों वैश्विक महामारी से निपटने के लिए संदेश दिया। खतरनाक वायरस से बचाव को लेकर बच्चों के घर पर ही रहकर रचनात्मक कार्य को लेकर चर्चा है। इससे विद्यालय के अध्यापक भी काफी गदगद हैं। उन्होंने कहा है कि इस तरह के प्रयास से लोगों को जागरूक किया जा सकता है। विद्यालय के प्रधानाचार्य गौतमदास गुप्ता ने चुनौती की व्यापकता को तुरंत समझा और एक पहल की और शिक्षकों को बच्चों के जीवन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिकाओं का एहसास कराया और शिक्षकों के द्वारा उद्देश्यपूर्ण सामग्री प्रदान करके बच्चों को प्रसन्नचित्त रहने एवं दी गई शिक्षण सामग्री को समझने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी के समय अपने बच्चों के लिए शिक्षक एक मजबूत स्तंभ की तरह हैं। शिक्षिका सीमा सिंह के संचालन में शिक्षकों के इस प्रयास में उन्हें स्वयं को अपडेट रखने के लिए सीबीएसई के नोटिफिकेशन, दिशानिर्देशों और परिपत्रों के साथ सुविधा प्रदान की जाती है। नियमित आधार पर कोरोना वाइरस से बचाव के लिए माता-पिता और बच्चों को घर पर सुरक्षित रहने के लिए प्रिंसिपल द्वारा अपील की जाती है। शिक्षकों द्वारा छात्रों को “घर के अंदर रहने की प्रतियोगिता” से अवगत कराया गया। उन्होंने बच्चों को मास्क, उचित हैंडवाशिंग, पोस्टर के माध्यम से सामाजिक भेद, चित्र और वीडियो के माध्यम से जागरूकता पैदा करने के लिए प्रेरित किया।स्कूल के ईको क्लब ने पहल की और मानदंडों का पालन करते हुए घर पर रह रहे बच्चों को तैयार किया, ताकि कोविद-19 से लड़ने के लिए उनकी कृतज्ञता और दृढ़ संकल्प को दर्शाते हुए एक कोलाज तैयार किया जा सके और समाज को एक मजबूत संदेश दिया जा सके। जिससे इस संकट के दौर में दृढ़ इच्छाशक्ति बनी रहे।

शिक्षक विभिन्न रणनीतियों और दृष्टिकोणों के साथ अपने विषयों पर कार्यपत्रक, लिंक, ऑडियोबुक जैसे पाठ्यक्रम और पाठ्यक्रम के साथ तालमेल बनाए रखने एवं बच्चों की रुचि बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। पाठ्यक्रम और योग आसनों की जानकारी साझा करने एवं प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने के लिए पौष्टिक भोजन करने की सलाह दे रहे हैं। कुछ अच्छे पेरेंटिंग टिप्स जैसे कि इनडोर गेम खेलने में उनके साथ समय बिताना, उन्हें जीवन कौशल सीखाना, विचारों को साझा करना, साथ में मस्ती करना, उन्हें व्यक्तिगत, बौद्धिक अन्वेषण के लिए स्थान प्रदान करना ताकि उनके बच्चें इस विकट परिस्थिति से शांति एवं सकारात्मकता से बाहर निकल सकें।


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