अगलगी की भेंट चढ़ जाती है सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल

मनोहर गुप्ता (संवाददाता)
* लॉक डाउन से कटाई में हो रही देरी
* जनपद में फायर संसाधनों की है कमी

डीडीयू नगर। एक तरफ कोरोना वायरस से निजात पाने के लिए सरकार कदम फूंक फूंक कर उठा रही है। वहीं दूसरी तरफ किसान गेहूं की फसल काटने में लगे हैं।उन्हें इसके लिए सोशल डिस्टेंसिंग भी फॉलो करना पड़ रहा है। वहीं किसानों को अगलगी की घटनाओं से दो चार होना पड़ता है। अभी जनपद में अगलगी की घटनाएं नहीं हो रहीं है। फ़ायर संसाधन की कमी भी है।
धान के कटोरे के रूप में विख्यात चन्दौली जनपद में इस समय गेहूं की फसल पक कर खेतों में लहलहा रही है।इस बार प्राकृतिक आपदा को झेलते हुए खेतों में फ़सल खड़ी है। दो बार ओले व बारिश से फसल का नुकसान हुआ है।उस समय किसान अपने साल भर की मेहनत की कमाई को प्रकति द्वारा रौंदे जाने से बेहद दुखी रहे। इसके बाद उस झंझावत से गुजरे तो कोरोना वायरस ने देश मे दस्तक दे दिया है। वायरस से सरकार को इतना हिला दिया कि देश के नागरिकों को इस वायरस से बचाने के लिए जनता कर्फ्यू के बाद 21 दिनों का लॉक डाउन करना पड़ा।इस के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो करना पड़ा रहा है।इससे पूरी देश की गतिविधियां ठप पड़ गई। गेहूं की फसल की कटाई का समय आ गया।इस पर सरकारें चिंतित हो गई। सरकार ने किसानों को राहत देते हुए मास्क के साथ सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो करते हुए गेहूं की कटाई का निर्देश दिया है। जिससे किसान खेत मे गेहूं की कटाई कर सके।इस समय कड़क धूप हो रही है।प्रत्येक वर्ष जनपद में खेतों व खलिहानों में पड़े गेंहू के फसल व बोझ अगलगी की भेंट चढ़ जाती हैI इससे किसान चिंतित हैं। इस समय लगातार बिजली की आपूर्ति हो रही है।खेतों से हाईटेंशन तार गुजरे हैं।हवा के झोको से स्पार्किंग या पक्षियों के बैठने से स्पार्किंग से निकली चिंगारी से खेतों में आग लग जाती है । जब तक किसान व ग्रामीण आग बुझाते या फायर ब्रिगेड पहुंचते तब तक काफी नुकसान हो जाता। जनपद में फायर संसाधन की भी कमी है।


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