वीडियो कॉलिंग से की जा रही 637 कम्युनिटी किचन की निगहबानी

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । कोरोना वायरस को लेकर पूरे देश में लगाए गए लॉक डाउन के बाद जनपद सोनभद्र में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे लोगों को भोजन मुहैया कराना था, जिनकी रोजी-रोटी इस लॉक डाउन के दौरान चली गयी थी। प्रदेश को दूसरे नम्बर पर सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले जनपद सोनभद्र में बड़ी संख्या में मजदूर खदानों में या निजी कंपनियों में ठेकेदार के अंडर में काम करते हैं। जिनकी इस लॉक डाउन के दौरान रोजी-रोटी चली गई। इतना ही नहीं इस दौरान चार राज्यों से घिरे जनपद सोनभद्र में बड़ी संख्या में बाहरी मजदूर पलायित होकर चले आये। जिन्हें प्रशासन ने क्वारन्टीन करा दिया, मगर उनके लिए भी भोजन की व्यवस्था करना प्रशासन के सामने एक नई चुनौती बनी गयी थी।

मगर जिलाधिकारी के अनोखे प्रयास से न सिर्फ पूरे जनपद के 637 ग्राम पंचायतों में कम्युनिटी किचन खोलकर लोगों को दो वक्त का भोजन कराया जा रहा है बल्कि सभी कम्युनिटी किचन में बन रहे भोजन व उसकी गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक दिन-रात वीडियो कॉलिंग के माध्यम से इसकी निगहबानी कर रहे है और समय-समय पर कम्युनिटी किचन की रैंडम चेकिंग भी की जा रही है।

अचानक रात में रॉबर्ट्सगंज विकास खण्ड अंतर्गत ग्राम सभा बहुआर में अन्नपूर्णा किचन का रैंडम चेकिंग करने पहुंचे सीडीओ अजय कुमार द्विवेदी से हमारे संवाददाता आनन्द कुमार चौबे ने खास बात की।

इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि “इस लॉक डाउन में कई श्रमिकों की रोजी रोटी बन्द हो गयी है उनके लिए शासन की तरफ से निर्देश था कोई भी व्यक्ति भूखा न सोये। हमारे जनपद में कई ऐसे श्रमिक परिवार हैं जो खदानों में काम करते थे। लॉक डाउन के दौरान उनकी दैनिक आमदनी बंद हो गयी है। शासन के निर्देशों पर जिलाधिकारी ने इसे बहुत ही गंभीरता से लिया, इसके लिए पूरी टीम गठित की गई जो जिले स्तर से इस कार्य को देख रही है। इसमें हमने कम्युनिटी किचन को यूनिवर्सल कर दिया है। सभी ग्राम पंचायतों में स्थापित कर दी गयी हैं, जिन ग्राम पंचायतों की संख्या ज्यादा है वहाँ एक से ज्यादा कम्युनिटी किचन चलाये जा रहे हैं। इस प्रकार से 680 कम्युनिटी किचन हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं। जिसमें लगभग 42000 लोगों को प्रतिदिन दो वक्त भोजन दिया जा रहा है। इसमें हम लोग रेगुलर मॉनीटरिंग कर रहे हैं, हर ब्लॉक के लिए, हर गाँव के लिए कर्मचारियों को तैनात किया गया है व्हाट्सएप कॉल से हम ये वेरीफाई करते हैं कि भोजन उपलब्ध है या नहीं, वितरण हो रहा है या नहीं। इसके अतिरिक्त कुछ सचल टीमें बनाई गई हैं जहाँ पर नेटवर्क की दिक्कत है वहाँ पर वो मौके पर जाकर देखते हैं कि खाना बना है कि नहीं। इसके अलावा लाभार्थियों से बात करते हैं कि खाने का क्वालिटी कैसी है उससे वो संतुष्ट हैं कि नहीं। इस कार्य की निगरानी के लिए जिले स्तर पर एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, इसकी मॉनिटरिंग जिलाधिकारी स्वयं करते हैं। प्रतिदिन उनको एक रिपोर्ट प्रेषित की जाती है, प्रतिदिन वो आकर कंट्रोल रूम की फंक्शनिंग देखते हैं और रैंडम आधार पर खुद जिलाधिकारी भी वीडियो कॉलिंग के माध्यम से संचालन देखते हैं।”

रात में इस चेकिंग के उद्देश्य के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसमें ये मैसेज देने का प्रयास है कि रैंडम आधार पर जिले के वरिष्ठ अधिकारीगण कभी भी कम्युनिटी किचन की जाँच कर सकते हैं।हमारे किचन वरियर्स सामाजिक और सेवाकार्य के तौर पर यह कार्य कर रहे हैं वो सिर्फ कार्यलय समय में ही कार्य नहीं कर रहे बल्कि देर रात तक जरूरतमंदों को भोजन करा रहे हैं।”

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