डराने लगा हैं लोगों को कोरोना के सपने, जानें डर से बचने के उपाय

क्या आपको कोरोनावायरस के सपने आ रहे हैं। अगर ऐसा है तो आप अकेले नहीं है। जो लोग ट्विटर पर अपने सपनों को हैशटैग पैनडेमिकड्रीम्स पर साझा कर रहे हैं वे इनसे आश्चर्यचकित हैं या बेहद डरा हुआ महसूस कर रहे हैं। ट्विटर पर एक उपयोगकर्ता ससारा स्काचनर ने लिखा, मैंने सपने में देखा कि मैंने एक उबर गाड़ी बुलाई, लेकिन उसकी जगह एक शववाहन आ गया। ये पैनडेमिक सपने अच्छे नहीं लग रहे।

ऐसे सपने सामान्य हैं :

विशेषज्ञों के अनुसार ये गुप्त प्रतिक्रियाएं सामान्य हैं। दिन के दौरान हम जो तनावपूर्ण जानकारी लेते हैं, उसे समझने को हमारा दिमाग बुरे सपने दिखा सकता है। या हम जीवन में पिछले अध्यायों का सपना देख सकते हैं जो कम तनावपूर्ण थे।

येल स्कूल ऑफ मेडिसिन के स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टर मेयर क्राइगर ने कहा, ये महामारी एक ऐसी घटना है जिसे पहले किसी ने अनुभव नहीं किया है। और यह संभव है कि उनका दिमाग एक ऐसा समय खोजने की कोशिश कर रहा है जब चीजें ऐसी नहीं थीं। यह तब होता है जब कभी-कभी लोग सो जाते हैं और वे अपने दिमाग को बंद नहीं कर पाते हैं।

सपनों के पीछे का विज्ञान:

नॉर्थम्ब्रिया यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान के प्रोफेसर जासॉन इलिस ने कहा, शोधकर्ताओं को अब तक पता नहीं की सपने क्यों आते हैं। लेकिन, इसके बारे में कुछ सिद्धांत दिए गए हैं। इसका एक विकासवादी सिद्धांत है जो कहता है कि हम सुरक्षित वातावरण में विभिन्न परिदृश्यों को आजमाने के लिए सपनों का उपयोग करते हैं, जो वास्तविक जीवन में चुनौतीपूर्ण या खतरनाक हो सकता है। अपने परिवार, काम और मानसिक परेशानियों के साथ एक महामारी के तनाव के कारण ऐसे परेशान करने वाले सपने आते हैं क्योंकि सपने न सिर्फ परिस्थितियों का सामना करने में मदद कर सकते हैं बल्कि वास्तविकता को भी प्रतिबिंबित कर सकते हैं। इस तरह के सपनों से दिमाग की परिस्थिति को झेलने की क्षमता मजबूत होती है।

असामान्य आदतें विकसित होना भी कारण:
महामारी को लेकर आने वाले सपने और उसकी कहानी असामान्य है। उससे भी ज्यादा असामान्य बात ये है कि हमें ये सपने याद रहते हैं, जबकि ज्यादातर सपने हम जागते ही भूल जाते हैं। इलिस ने अनुसार लॉकडाउन में घर में रहने के दौरान ज्यादा शराब का सेवन करने से याददाश्त ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं और इसलिए सपने याद रहते हैं। वहीं, लोग घरों में रहने के दौरान टीवी पर रोमांचक और मनोरंजक शो देखने ज्यादा पसंद कर रहे हैं और साथ ही समय-समय पर खबरें भी देख रहे हैं।

ध्यान दें:
सोने से पहले टीवी या फोन देखने से खराब होती है नींद की गुणवत्ता
घर में रहने के दौरान ज्यादा शराब का सेवन न करें
सपने परिस्थिति का सामना करने में मदद करते हैं

डर के माहौल में ऐसे रहें सकारात्मक

सकारात्मक भावनाएं:
सोशल मीडिया और खबरों पर ज्यादा समय व्यतीत न करें और समसामयिकी की जानकारी के लिए दिन में सिर्फ एक बार खबरें सुनें। अपने घर और परिवारजनों की मदद करें और उन्हें उत्साहित करते रहें।

व्यस्त रहें:
लॉकडाउन के दौरान पूरे दिन व्यस्त रहने के लिए एक दिनचर्या निर्धारित करें। कार्यों में व्यस्त रहने से शरीर में सकारात्मक हार्मोन पैदा होता है जो डर और परेशानी को दूर करने में मदद करता है। कसरत, संगीत, इनडोर खेलों में खुद को व्यस्त रखें।

संबंधों को बेहतर करें:
भागदौड़ के कारण लोग अक्सर संबंधों पर ध्यान नहीं दे पाते। इस समय में अपने परिवारजनों और अपने पड़ोसियों के साथ अच्छा संबंध रखें। शारीरिक रूप से दूर रहें, लेकिन लोगों के साथ भावनात्मक रिश्ता बनाए रखें। सोशल मीडिया के द्वारा लोगों के संपर्क में रहें।

अच्छी नींद लें:
ऐसी कठिन परिस्थितियों में सकारात्मक रहना मुश्किल काम है। लेकिन, नींद की गुणवत्ता बेहतर करने से न सिर्फ स्वास्थ्य अच्छा रहेगा बल्कि कई लोग कई गंभीर समस्याओं से भी बच सकेंगे। सोने से दो से तीन घंटे पहले टीवी या फोन न देखें। सोने से पहले खबरें न देखें। अच्छी नींद नहीं मिलने से अवसाद के पनपने का खतरा बढ़ जाता है।


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