जीविकोपार्जन की समस्या से जूझ रहे हैं तिलवारी गड़ई के आदिवासी

शशि चौबे/संजय केसरी (संवाददाता)

डाला । कोरोना वायरस ने विश्व के अधिकांश देश को अपनी गिरफ्त में ले लिया है ।
यूं तो भारत में कोरोना की शुरुआत धीमी गति से शुरू हुआ। लेकिन पीएम मोदी ने सारी परिस्थिति व परिणामों को ध्यान में रखते हुए 21 दिनों के लॉक डाउन करने की घोषणा कर दी ।

लॉक डाउन के दौरान प्रशासन के सामने सबसे बड़ी समस्या लोगों की जरूरतों को पूरा करना था । सरकार ने सभी एक्टिव मनरेगा मजदूरों के अलावा दिहाड़ी मजदूर, स्ट्रीट वेंडर, पल्लेदार के अलावा कई स्कीमों के तहत लोगों को राहत पहुंचना शुरू कर दिया । राशन कार्ड धारकों को राशन भी वितरित कर दिया गया ताकि कोई भी गरीब व जरूरतमंद परिवार भूखे पेट न सोए । इसी कड़ी में जनपद सोनभद्र के जिला अधिकारी ने एक नया तरीका आजाद कर दिया सोनभद्र के सभी 637 ग्राम पंचायतों में कम्युनिटी किचन चला कर दो वक्त लोगों को भोजन की व्यवस्था करा दी भोजन की व्यवस्था की जिम्मेदारी मुख्य विकास अधिकारी अजय द्विवेदी को दी गई ग्राम पंचायतों में प्रधान शिक्षक विभाग के कर्मचारियों की मदद से लोगों को घर-घर पहुंचाने की व्यवस्था कर दी जुगाड़ करने में असमर्थ थे जनपद न्यूज़ LIVE की टीम ने आज विकास खण्ड चोपन के कोटा ग्राम पंचायत के टोला तिलवारी गड़ई में पहुंची, जहां लगभग 20 घरों का ऐसा टोला हैं जिनके पास न तो राशन कार्ड हैं औऱ न ही जॉब कार्ड । इस टोला के अदिवासी रोज दिहाड़ी मजदूरी करके अपना जीवनपार्जन करते थे मगर लॉकडाउन के कारण इनकी मजदूरी चली गयी । अब इनके सामने खाने की व्यवस्था करना एक बहुत बड़ा संकट है ।

जनपद न्यूज LIVE के रिपोर्टर ने इन टोलों में रहने वाले आदिवासियों से बात की । आदिवासियों ने बताया कि इनके पास न राशनकार्ड हैं और न ही जॉबकार्ड । उन्होंने बताया कि राशनकार्ड के लिए कोटा प्रधान से कई बार कह चुके हैं परंतु दौड़ने के सिवा कुछ भी हाथ नही आया । आदिवासियों में बताया कि इन्हें परिवार को खिलाने की चिंता सताने लगी है । उन्होंने बताया कि यह टोला लगभग 20 घरों का हैं और कुल आबादी लगभग पचास सदस्यों की होगी।

बड़ा सवाल यह है कि जनपद के सभी 637 ग्राम पंचायतों में जिलाधिकारी एस राजलिंगम के आदेश पर कम्युनिटी किचन चलाया जा रहा है तो यह टोला छूटा कैसे ।
बहरहाल जनपद में अधिकारी इस बात की फिक्र कर रहे हैं कि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए लेकिन जिस तरह से यह तस्वीर सामने आ रही हैं ऐसे में यह कहा जा सकता है कि निचले स्तर पर कुछ लापरवाही तो जरूर है । कहीं ऐसा न हो कि छोटी सी लापरवाही प्रशासन के सारे प्रयासों पर पानी फेर दे ।


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