शबे बरात निजात व छुटकारा पाने की रात है- मौ. नजीरुल कादरी

रमेश यादव (संवाददाता)

दुद्धी। शाबान की 15वीं रात शबे बरात के नाम से मशहूर है। इसे निजात व छुटकारा पाने की रात भी कहा जाता है। यह बहुत मुबारक रात है, क्योंकि अल्लाह पाक अपने उन बंदों को अपनी रहमतों से बख्श देता है जो इस रात सच्चे दिल से अपने गुनाहों से तौबा करते हैं।
पूरी रात अल्लाह की रहमत बंदों को आवाज देती है। सूरज डूबते ही रहमत के फरिश्ते आसमान से जमीन पर आ जाते हैं, और पूरी रात अल्लाह की रहमत व बख्शिश के तलबगारों को बख्शिश का परवाना अता करता है। रोजी के तलबगारों रोजी के असबाब दिए जाते हैं, बीमारों के लिए शिफा के सामान तैयार किए जाते हैं। इसी तरह और भी प्रकार के इनाम व इकराम बक्शे जाते हैं।
कहा जाता है कि शाबान का महीना जिसे अल्लाह के रसूल ने अपना महीना फरमाया है। उसकी कद्र व अहमियत के क्या कहने। अल्लाह के रसूल ने फरमाया कि शाबान की 15वीं रात थी। हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम मेरे पास तशरीफ लाए और बोले या रसूल अल्लाह अपना सर आसमान की तरफ उठाएं। आपने सर को ऊपर की तरफ उठाया और पूछा कि जिब्राइल यह कैसी रात है? उन्होंने बताया कि या रसूलल्लाह यह शाबान की 15वीं रात है। इस रात अल्लाह पाक अपनी रहमत के 300 दरवाजे खोलता है। इस रात अपनी रहमत से बेशुमार बंदों को बक्श देता है। लेकिन शिर्क करने वाले, जादू करने वाले, हराम काम करने वालों, सूद खाने वालों, शराब पीने वालों को नहीं बख्शता है। हां अगर यह लोग इस रात के आने से पहले अपने गुनाहों की सच्ची तौबा कर लें, फिर वह गुनाह ना करें तो अल्लाह पाक उन्हें भी बख्श सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि शाबान की 15वीं रात में ही आइंदा साल भर में होने वाली घटनाएं-दुर्घटनाएं, जिंदगी-मौत, तंदुरुस्ती-बीमारी वगैरह का फैसला किया जाता है, और दुनियां के काम जिम्मेदार फरिश्तों को सौंप दिए जाते हैं। रोजी तकसीम करने की जिम्मेदारी हजरत मिकाइल अलैहिस्सलाम को, लड़ाई-झगड़े, जलजले, आसमानी बलाएं वगैरह का काम हजरत जिब्राइल को सौंप दिया जाता है। इसी तरह दूसरे और फरिश्तों को उनके काम सौंप दिए जाते हैं। इसीलिए तो इस रात के बारे में अल्लाह ने फरमाया इस रात हर हिकमत वाला (अहम काम) फरिश्तों को बांट दिया जाता है


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