दूरदराज आदिवासी क्षेत्रों में राहत न पहुंचने से लोग परेशान, प्रशासन से उम्मीद

शशिचौबे/ संजय केसरी (संवाददाता)

डाल। आदिवासी क्षेत्रों में दैनिक मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले जरूरतमंद मजदूरों के पास राहत नहीं पहुंचने से उनकी समस्याएं जटिल हो रही हैं ।ग्रामीण अभी भी जिला प्रशासन की तरफ आस लगाए बैठे हैं । चोपन विकासखंड के कोटा ग्राम पंचायत के तेलगुड़वा पश्चिम में स्थित मुसहर, गौड़ और बैगा जाति के तीस घरों की एक बस्ती स्थित है जहां के लोग आज लॉक डाउन के दौरान उत्पन्न हुई समस्या के कारण उनके पास पैसे नहीं होने से कोटे का राशन भी नहीं उठा पा रहे हैं । जनपद न्यूज़ लाइव की टीम ने जब इन बस्ती में दौरा कर लोगों से बातचीत किया तो लोगों ने बताया कि एक दिन कुछ लोगों के द्वारा खाने का पैकेट वितरण किया गया था । जिसके बाद दोबारा फिर कोई नहीं आया। एक महिला ने बताया कि जॉब कार्ड हम लोग के बने होने के बाद भी उस पर आज तक काम नहीं लिया गया।

पहले जंगलों से लकड़ियां बिनकर बाजारों में बेचकर जीविका चलाते थे, अब सब बंद होने से पैसे भी नहीं मिल पा रहे हैं ।आलम यह है कि हम लोग के घर परिवारों में खाने-पीने की समस्याएं बढ़ गयी है । बस्ती के रहने वाले कलावती, रामसुंदर, गणेश, परमेश्वर, मोती, जसवंती, रामविलास आदि ने बताया कि हम लोगों तक लोग नहीं पहुंच पाते हैं । हम लोग मुख्य सड़क से काफी अंदर है। हम लोगों तक आने का रास्ता भी नहीं है । राहत व अच्छी बात यह है कि यहां प्रशासन की पहुंच न होने के बाद भी लोग काफी जागरूक दिखे । लॉकडाउन व करोना जैसी बिमारी को लेकर क्षेत्र के आदिवासी काफी सजग हैं। परन्तु उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर जिला प्रशासन का प्रयास कब तक इस बस्ती वालों के लिए पहुंचेगा यह कहना मुश्किल है । हम उम्मीद करते हैं कि प्रशासन मीडिया के द्वारा दी जा रही जानकारी को गंभीरता से लेते हुए बस्ती के लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाएगी । क्योंकि प्रशासन का संकल्प हैं कि कोई भी भूखा न सोए ।

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