बेबसी,बेचारगी व लाचारी बन गया लॉक डाउन

मनोहर गुप्ता (संवाददाता)
* गरीबों के लिए दो वक्त की रोटी का संकट
* फिर भी कोरोना को हराने के लिए जंग में साथ

डीडीयू नगर। वैश्विक बीमारी व महामारी का रूप लेकर भारत मे दस्तक दे चुका कोरोना से अब तक लगभग दो हजार से ज्यादा लोग संक्रमित है। सरकार ने इस रोग के बढ़ते प्रभाव व संक्रमण को रोकने के लिए देश में 21 दिन का लॉक डाउन घोषित किया है। दी गई लॉक डाउन की अवधि का एक सप्ताह का समय बीत गया है। लोग इस का पालन कर रहे हैं।लॉक डाउन से अब लोगों के लिए निवाले का संकट खड़ा हो रहा है।रोज कमाने खाने वालों के लिए मुसीबतों की घण्टी घनघना रही है। सरकारी व समाज सेवी संस्थाओं,राजनीतिक दलों के अलावा व्यतिगत तौर पर भी लोग कोई भूखा न रहे इस नारे को साकार करने के लिए भोजन के पैकेट व खाद्य सामग्री मुहैया कराने की कोशिश में लगे हैं। फिर भी जरूरतमंदों को जरूरत की चीज नहीं मिल पा रही है।ग्रामीण क्षेत्रों में यह संकट और गहरा रहा है। कोरोना के संकट से उबरने व निपटने के लिए सामाजिक दूरी को एक उपाय बतया गया है।अब खेती किसानी का दौर शरू है।खेतों में गेहूं की फसल खड़ी है।इसकी कटाई व मड़ाई का भी संकट है।
देश इस समय वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा है। विविधताओं से परिपूर्ण इस देश मे लॉक डाउन 21 दिनों के लिए घोषित किया गया है। संकट के समय मे पूरा देश एक साथ खड़ा है। लेकिन लॉक डाउन ने बेबसी,बेचारगी व लाचारी का नया दौर शुरू कर दिया है।21 दिन के लॉक डाउन में परिवहन साधनों के अलावा दुकानों पर तालाबंदी है। चाय पान,ठेला खुमचा,दिहाड़ी मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले अब एक सप्ताह में ही परेशान होने लगे है। बतातें हैं कि अब रखी गई पूंजी को उपयोग किया जा रहा है।सरकार ने लोगों के पेट भरने के इंतजाम करने की कवायद की है।लेकिन पेट भरने तक ही लोगों की तृप्ति पूर्ण नहीं होगी। मुफ्त की सेवाएं कितनी दिन तक दौड़ लगाएगी। कहां कहां तक पहुंचेगी। धान के कटोरे के रूप में विख्यात चन्दौली में ज्यादा तर लोग खेती किसानी और मजदूरी पर आश्रित हैं।बाहर कमाने वाले भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। पूंजी न होने के कारण लोग जरूरत के सामान भी नहीं खरीद पा रहे हैं।ग्रामीण अंचलों सेवाएं नहीं पहुँच पा रही है। ग्रामीण क्षेत्रो के अधिकांश लोग निर्माण कार्यों में लगे रहते हैं।मसलन पेंटर,कारपेंटर, प्लम्बर,राजमिस्त्री, दुकानों पर काम करने का कार्य करते हैं।वहीं परिवहन साधन बन्द होने से चालक व खालसी भी घरों पर पड़े हैं। लॉक डाउन व सोशल डिस्टेंसिंग ने एक नई समस्या खड़ी कर दिया है। लेकिन यह कोरोना वायरस के प्रभाव को कम करने व संक्रमण के बढ़ाव को रोकने का कारगर उपचार माना जा रहा है। विश्व के अन्य देशों में भी जहां कोरोना का प्रभाव ज्यादा खतरनाक मोड़ पर है वहां भी लॉक डाउन है। 21 दिनों के लॉक डाउन व सोशल डिस्टेंसिंग की निर्धारित सीमा में एक सप्ताह गुजर गए हैं। आने वाले समय के संकट को भी जनता झेलने को तैयार है।


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