गुरमा चौकी पर नए इंचार्ज ने संभाली कमान, बेहतर माहौल बनाने की होगी चुनौती

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

– सीओ की जांच में सिपाही भी हो सकते हैं दोषी, गिर सकती है गाज

– कार्यवाही के बाद लोगों में बढ़ा न्याय का विश्वास

– पीड़ित के मुताबिक चौकी इंचार्ज से ज्यादा सिपाही ने की थी दुकानदार की पिटाई

– जनपद न्यूज Live की पहल के बाद एक्शन में दिखा पुलिस प्रशासन

सोनभद्र । एक किराना दुकानदार की पिटाई के आरोप में गुरमा चौकी इंचार्ज जय शंकर राय को लाइन हाजिर कर दिया गया था। जिसके 2 दिन बाद आज पुलिस अधीक्षक ने गुरमा चौकी इंचार्ज के रूप में प्रमोद यादव की तैनाती की है। प्रमोद यादव इसके पहले शक्तिनगर में एसएसआई के पद पर तैनात थे।

आपको बता दें कि लॉक डाउन के बाद सरकार ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया था कि किसी भी हालत में कोई भी व्यक्ति बाहर ना निकले, जहां तक हो सके लोगों को उनकी जरूरत के सामानों को डोर टू डोर पहुंचाया जाए। इसी क्रम में सोनभद्र प्रशासन ने डोर टू डोर सप्लाई देने के लिए प्रत्येक एरिया से कुछ दुकानदारों को चिन्हित कर उनको लाइसेंस जारी किया था। मारकुंडी मोड़ पर स्थित पाल जनरल स्टोर को नगर पंचायत चुर्क-गुरमा द्वारा किराना सप्लाई हेतु पास जारी किया गया था।

दुकानदार शशिकांत पाल का आरोप था कि वह दुकान खोलकर लोगों का ऑर्डर पैक कर रहा था कि उसी दरमियां दुकान पर पहुंचे चौकी इंचार्ज जय शंकर राय व उनके सिपाही उन्हें गाली देने लगे। जब वह और उसका लड़का इसका विरोध करने लगे तो दौड़ा-दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया। दुकानदार पाल का कहना था कि उसके बेटे को चौकी इंचार्ज व सिपाही ने इस कदर बेरहमी से पीटा कि वह बेहोश होकर गिर पड़ा । जिसके बाद पुलिस उसे उठाकर चोपन थाने ले गई और उसका बेटा गिरा पड़ा रहा। दुकानदार पाल ने बताया कि काफी सिफारिश के बाद उसे देर रात थाने से छोड़ा गया। जिसके बाद वह घर पहुंचा तो बेटे की स्थिति गंभीर देख रात में ही जिला अस्पताल में उसका मेडिकल कराया और सुबह पूरा मामला लिखित रुप से उच्च अधिकारियों को बताया।
लेकिन लॉक डाउन की व्यस्तता के बीच अधिकारी मामले को उतनी गंभीरता से नहीं लिया। मगर इस पूरे मामले को ज़ब जनपद न्यूज लाइव ने प्रमुखता से उठाया तो अधिकारियों में हड़कंप मच गया और पुलिस अधीक्षक ने तत्काल चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर जांच सीओ को सौंप दिया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि किसी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है, चाहे वह व्यक्ति विभागीय ही क्यों ना हो।

वहीं सूत्रों के मुताबिक सोमवार को सीओ ने पीड़ित पक्ष के अलावा कई लोगों का बयान दर्ज किया है।

अब देखने वाली बात यह है कि सीओ की जांच में चौकी इंचार्ज के अलावा और कितने पुलिस कर्मी दोषी करार दिए जाते हैं क्योंकि मारपीट की शुरुआत चौकी इंचार्ज ने जरूर शुरू किया था मगर गलत होने के बावजूद अपने अफसर को खुश करने के चक्कर में सिपाही ने भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ा।
ऐसे भी पुलिस को उन सभी दोषियों को स्टेशन हटा लेना चाहिए जो शनिवार की घटना में शामिल थे। क्योंकि उनकी मौजूदगी कभी भी तल्ख हालात पैदा कर सकती है। अब लोगों को पुलिस की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।


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