मानवता को समर्पित हैं बीएचयू के डॉ. अशोक सोनकर

राकेश यादव रौशन (संवाददाता)

मारूफपुर । जीवन की अनुकूल लहरों में तो बहुतेरे कामयाबी की गंगा पार कर लेते हैं, किंतु जब धाराएं विपरीत हों तो लहरों को चीरकर जो मंजिल तक पहुंचता है, वहीं असली नाविक कहलाता है। पहड़िया वाराणसी निवासी डॉ. अशोक सोनकर जीवन सफर के एक ऐसे ही पथिक हैं, जिन्होंने पथरीली राहों के बावजूद कामयाबी की सीढ़ी चढ़े।
डॉ. अशोक सोनकर का जन्म 01 जनवरी 1980 को पहड़िया वाराणसी निवासी पन्नालाल सोनकर के द्वितीय पुत्र के रूप में हुआ था। बचपन से ही पढ़ाई में कुशाग्र बुद्धि थे। किंतु पिता के पास अशोक को पढ़ाने के लिए पैसे नहीं थे। अशोक का बचपन बहुत ही संघर्षों और अभावों में बीता। उच्च शिक्षा के लिए ये वर्ष 2002 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रवेश लिए। वहीं से बीए, एमए, नेट, जेआरएफ, पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप और पीएचडी किये। आज बीएचयू के इतिहास विभाग में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
डॉ. अशोक सोनकर को छात्र जीवन से ही समाजसेवा का जुनून था। अपने सीमित संसाधनों में भी ये लोगों की मदद किया करते थे। आज अशोक के पास से कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति खाली हाथ नहीं जाता। कोरोना की इस महामारी में वे रोजाना जगह-जगह खाद्यान्नों का वितरण अपने निजी खर्च पर कर रहे हैं।

उपलब्धियां
सहायक प्रोफेसर के रूप में अशोक बीएचयू में अनेक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
1. सदस्य – बीएचयू के सबसे बड़े कार्यक्रम “अभिकल्पन” के संचालन समिति।
2. सदस्य – भारतीय इतिहास संकलन समिति, काशी
3. शताब्दी वन समिति, बीएचयू।
4. एकेडमिक काउंसलर, इग्नू बीएचयू।
5. असिस्टेंट कोऑर्डिनेटर – केंद्रीय परीक्षा समिति, बीएचयू।
6. वार्डेन – पंडित ब्रजनाथ छात्रावास, समाजिक विज्ञान संकाय, बीएचयू।
डॉ. अशोक सोनकर ने आरएसएस की विचारधारा से प्रेरित होकर 1997 में ही इसकी सदस्यता ले ली थी। उनका मानना है कि आरएसएस राष्ट्र उत्थान की भावना से भरा है। यह एकमात्र ऐसा संगठन है, जो देश का चहुमुंखी विकास कर सकता है। आज ये आरएसएस के गौतम बुद्ध नगर, काशी के बौद्धिक प्रमुख हैं। इनकी योग्यता समाज के प्रति समर्पण को देखते हुए बिहार विद्वत परिषद ने इन्हें प्रतिष्ठित सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया है।

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