अपडेट : समस्याओं को लेकर कल से हड़ताल कर सकते हैं एम्बुलेंसकर्मी

आनन्द चौबे/विनोद धर (संवाददाता)

सोनभद्र । पूरे देश में कोरोना जैसे महामारी को लेकर पीएम मोदी की अपील के बाद 21 दिनों का लॉक डाउन चल रहा है ताकि लोग घरों से बाहर न निकल सके और सोशल डिस्टेंस बना रहे।
कोरोना जैसी महामारी से लड़ने में स्वास्थ्य विभाग का अहम रोल है। जहां इस वक्त लोग अपनों से दूर हो गए हैं वहीं स्वास्थ्य विभाग हर एक मरीज को चेक कर उसका निदान कर ठीक करने में लगा हुआ है। पीएम मोदी ने भी अपने मन की बात में स्वास्थ्य विभाग की तारीफ की थी। मगर सोनभद्र में स्वास्थ्य विभाग में अहम रोल निभाने वाले एम्बुलेंस कर्मियों का धैर्य अब जबाब देने लगा है। पिछले 3 महीने से वेतन न मिलने से एंबुलेंस कर्मी भुखमरी के कगार पर आ गए हैं।

एंबुलेंस कर्मियों का कहना है कि उनका ना तो पीएफ कट रहा है और ना ही उनको वेतन दिया जा रहा है। एंबुलेंस कर्मियों का आरोप है कि जिन लोगों के पास कोई जाना नहीं चाहता उन लोगों को वे एंबुलेंस में भरकर अस्पताल तक पहुंचाते हैं। मगर उनका दर्द कोई भी सुनने वाला नहीं है। एंबुलेंस कर्मियों का कहना है कि वे प्राइवेट कर्मी जरूर हैं मगर अपनी जिम्मेदारी बखूबी जानते हैं। इसलिए विषम परिस्थितियों में भी वे अपनी सेवा पूरी तन्मयता के साथ दे रहे हैं लेकिन जिस तरह से इस कोरोना वायरस जैसे महामारी के बीच में उनको बिना किट उपलब्ध किए तथा अन्य संसाधन दिए बगैर भेज दिया जा रहा है, ऐसे में वह खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि उच्च अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक कई बार कहा गया। मगर कोई भी सुधि नहीं लिए, हर बार उनको आश्वासन ही मिलता रहा।

एंबुलेंस कर्मियों ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि मंगलवार दोपहर तक यदि उनकी मांगे नहीं मानी गई तो वे अपनी सेवाएं बंद कर देंगे। उनका कहना है कि उनकी सेवाओं को बंद करने से मरीजों को इस वक्त काफी परेशानी होगी, वह इस बात को समझ रहे हैं। मगर उनकी मजबूरी को कोई भी समझने वाला या सुनने वाला नहीं है।

जिलाध्यक्ष अश्विनी पांडेय ने सरकार को चेताते हुए कहा कि प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर आज हमलोगों ने प्रदर्शन कर अपनी मांगों को सरकार के सामने रखा है। यदि कल दोपहर तक हमारी माँग नहीं मानी गयी तो हम कार्य स्थगित करने को बाध्य होंगे।

केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार ने विषम परिस्थितियों में काम करने वाले हर कर्मचारियों व नागरिकों के लिए बजट का पिटारा खोल दिया है ताकि वे किसी कष्ट में ना रहे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि तमाम दावे व सुविधाएं मुहैया कराए जाने के बाद भी एंबुलेंस कर्मी आखिर क्यों अछूते हैं?

वहीं पूरे मामले पर जब मुख्य चिकित्साधिकारी से बात करने का प्रयास किया गया तो उनके मोबाइल की घण्टी बजती रही लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

“ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भी है कि जब एंबुलेंस कर्मी सुरक्षित नहीं रहे तो मरीज के साथ डॉक्टर या पूरा अस्पताल कैसे सुरक्षित रहेगा?


अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
error: Content is protected !!