ग्रामीण स्तर पर बाहरी राज्यों से लौटे मजदूरों की जांच न होने से लोगों में बढ़ रहा दहशत

शशि चौबे / संजय केसरी (संवाददाता)

– प्रशासन के पास नहीं है ऐसा कोई आंकड़ा कि कितने लोग बाहरी राज्यों से लौटे

– प्रधान स्तर पर होनी चाहिए व्यवस्था

– गांव में प्रवेश से पूर्व जांच का होना चाहिए नियम

– तबियत बिगड़ने पर खुद मरीज पहुंच रहा अस्पताल

– अस्पताल पहुंचते ही मच रहा हड़कम्प

– जिले के कई इलाकों में मजदूर कमाने के लिए ठेकेदार के माध्यम से जाते हैं बाहर


डाला । जिस तरह आज पूरी दुनिया कोरोना वायरस को लेकर चिंतित और इससे बचने के उपाय ढूंढ रहा हैं । वहीं भारत में रविवार को पीएम मोदी के अपील के बाद जनता कर्फ्यू लगा रहा । इस दौरान सभी लोग चाहे वह किसी भी धर्म जाति का हो घर पर रह कर सरकार को अपना पूरा समर्थन दिया । सरकार इसे लेकर जितना संजीदा व गम्भीर है वहीं जिले स्तर पर हो रही लापरवाही भी अब सामने आ रही है । यदि जनपद सोनभद्र की बात करें तो जनपद के कई इलाके ऐसे हैं जहां से मजदूर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के लिए जाते हैं और इनकी संख्या बहुत है । कोरोना जैसी महामारी के बीच होली भी इसी माह था, बड़ी संख्या में मजदूर अपने गांव लौटे थे, इसके अलावा कई राज्यों में कोरोना फैलने के बाद कामकाज बन्द कर दिया गया, जिसके बाद वहां काम कर रहे मजदूरों को भी घर भेज दिया गया । ऐसे में वे मजदूर जो होली या संस्था बन्द होने पर घर लौटे हैं इसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं। जनपद में प्रशासन के पास ऐसे लोगों का कोई आंकड़ा नहीं जो बाहर से काम कर लौटे हैं । जनपद में गुरमुरा, जुगैल, कोन, दुद्धी, म्योरपुर, सांगोबांध, विंढमगंज आदि कई इलाके हैं जहां से अक्सर मजदूर ठेकेदार के माध्यम से बाहर कमाने जाते हैं ।ऐसे में सवाल यह उठता हैं कि क्या प्रशासन को चिन्हित कर इन सभी की जांच नहीं करवानी चाहिए ? प्रशासन उस समय हरकत में आता है जब बाहरी व्यक्ति खुद अस्पताल पहुंचता है और जांच की बात करता है । ऐसा ही मामला रविवार को म्योरपुर में देखने को मिला । जनता कर्फ्यू के दिन म्योरपुर के कुंडाडीह निवासी तबीयत खराब देख खुद म्योरपुर अस्पताल पहुंच गया । वहां जाकर वह अपनी परेशानी बताया । जैसे ही डॉक्टर को यह जानकारी हुई कि यह व्यक्ति राजस्थान से लौटा है, डॉक्टर ने उसे तत्काल बाहर परिसर में बैठा दिया और एम्बुलेंस बुलाकर जिला अस्पताल भेज दिया । जिला अस्पताल जब डॉक्टरों ने जांच की तो कोरोना जैसा कोई लक्षण नहीं मिला, लिहाजा उसे घर जाने के लिए कह दिया । मगर जिस एंबुलेंस से वह जिला अस्पताल आया था वह वापस ले जाने से साफ मना कर दिया । ऐसे में जिला अस्पताल के डॉक्टर ने उसे भर्ती दिखाकर अपने यहां शरण दी ।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि जब कोरोना को लेकर हर किसी के अंदर इतना भय बना हुआ है और बाहरी व्यक्ति को भी शक की निगाह से देख रहा है तो ऐसे बाहरी व्यक्ति को पहले चिन्हित क्यों नहीं किया जा रहा । आखिर अस्पताल पहुंचने के बाद ही क्यों हर कोई हरकत में आ रहा है । यह एक्शन उस समय से शुरू हो जानी चाहिए ज़ब वह मजदूर या व्यक्ति गांव क्षेत्र में प्रवेश कर रहा हो । तत्काल उसे अस्पताल भेज कर प्रारंभिक जांच करने के बाद ही गांव में प्रवेश दिया जाना चाहिए, और इसकी जिम्मेदारी प्रधानों को दी जानी चाहिए ।
बहरहाल यूपी के 15 जिलों को सरकार ने लॉक डाउन कर दिया है । यानी उन जिलों में दिक्कतें ज्यादा है । जबकि कई राज्यों ने 31 मार्च तक लॉक डाउन करने का आदेश दे रखा है । मजे की बात यह है कि यह सब वही राज्य हैं जहां जनपद सोनभद्र से मजदूर काम के लिए जाते हैं । तो क्या ऐसे लौटे मजदूर को चिन्हित कर जांच कराने की आवश्यता नहीं ।


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